स्टॉकहोम में केमिस्ट्री के नोबेल पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा की गई है. इस बार फ्रांस के साइंटिस्ट हेनरी बी. कागन और जापान के साइंटिस्ट केन्सो सोई को संयुक्त रूप से इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है. दोनों वैज्ञानिकों को असममित कार्बनिक संश्लेषण में नॉन-लीनियर प्रभावों और ऑटोकैटालिसिस से जुड़े उनके काम के लिए सम्मानित किया गया है. उनकी खोजों ने रासायनिक प्रतिक्रियाओं को बेहतर तरीके से समझने और नियंत्रित करने में मदद की है. इन वैज्ञानिक उपलब्धियों का इस्तेमाल दवाओं, सुगंध और अन्य उपयोगी रासायनिक पदार्थों के विकास में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ है.
हेनरी कागन को किस खोज के लिए मिला नोबेल?
फ्रांस के साइंटिस्ट हेनरी बी. कागन ने रासायनिक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने के तरीके को विकसित करने में जरूरी योगदान दिया. उनकी खोज से वैज्ञानिकों को किसी रासायनिक प्रतिक्रिया के दौरान एक विशेष प्रकार की आणविक संरचना ज्यादा मात्रा में तैयार करने में मदद मिली.कई रासायनिक अणुओं (molecules) की संरचना एक-दूसरे की दर्पण छवि जैसी होती है. ये देखने में मिलती-जुलती हैं, लेकिन उनके गुण और व्यवहार अलग हो सकते हैं. खासकर दवाओं के निर्माण में ऐसी संरचनाओं का सही चयन जरूरी होता है. कागन के काम ने इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों को नई संभावनाएं दीं. इससे दवाओं, फ्लेवर, खुशबू और नई सामग्रियों के विकास में मदद मिली.
केन्सो सोई की खोज क्यों है खास?
जापान के साइंटिस्ट केन्सो सोई ने ऐसी रासायनिक प्रतिक्रिया विकसित की, जिसमें दो संभावित मिरर इमेज स्ट्रकचर में से एक को प्रमुख रूप से बनाया जा सकता है. उनकी इस उपलब्धि को असममित कार्बनिक संश्लेषण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है.इस प्रक्रिया में ऑटोकैटालिसिस की अहम भूमिका है. इसका अर्थ है कि रासायनिक प्रतिक्रिया से बनने वाला प्रोडक्ट उसी प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है. सोई की खोज ने यह समझने में मदद की कि रासायनिक प्रतिक्रियाओं में किसी एक प्रकार की संरचना को किस तरह प्राथमिकता दी जा सकती है. इस प्रक्रिया को सोई रिएक्शन के नाम से जाना जाता है.















