अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है। एक फेडरल जज ने बुधवार को H-1B वीजा की 1 लाख डॉलर वाली फीस को ब्लॉक कर दिया, यानी इस फीस पर रोक लगा दी।कैलिफोर्निया के ओकलैंड में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज हेवुड गिलियम ने फैसला सुनाया कि ट्रंप की फीस लागू करने से पहले USCIS और अमेरिकी विदेश मंत्रालय जरूरी नियम बनाने की प्रक्रियाओं का पालन करने में नाकाम रहे।अमेरिका में H-1B वीजा एक पॉपुलर वर्क वीजा है, जिसके जरिए हर साल हजारों भारतीय जॉब करने जाते हैं।
हर साल 65 हजार H-1B वीजा जारी होते हैं, जबकि 20 हजार वीजा उन स्टूडेंट्स के लिए रिजर्व हैं, जिन्होंने अमेरिका में हायर एजुकेशन हासिल की है। अमेरिका में एक तबका ऐसा है, जिसका कहना है कि अमेरिकी कंपनियां H-1B वीजा के जरिए सस्ते विदेशी वर्कर्स की हायरिंग करती हैं और फिर स्थानीय अमेरिकियों को नौकरी से निकाल देती हैं।
पहले भी एक कोर्ट ने लगाई थी फीस पर रोक
- डेमोक्रेट और तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा नियुक्त जज गिलियम ने यूनियनों, कंपनियों और नॉन-प्रॉफिट एजेंसियों के एक ग्रुप की मांग को मंजूरी दी है।
- उनकी मांग थी कि पिछले साल अक्टूबर में दायर मुकदमे का फैसला आने तक एजेंसियों को ट्रंप की फीस लागू करने से रोका जाए।
- 20 राज्यों की ओर से दायर एक अलग मामले में फैसला सुनाते हुए, बोस्टन के एक फेडरल जज ने जून में इस फीस पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी।
- जुलाई में बोस्टन की एक अपील कोर्ट ने उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
- 1 लाख डॉलर की फीस 21 सितंबर को एक्सपायर हो रही थी, लेकिन फिर ट्रंप ने इसे एक साल के लिए और बढ़ा दिया।
मुकदमा करने वालों की तरफ से लड़ने वाले वामपंथी झुकाव वाले कानूनी ग्रुप ‘डेमोक्रेसी फॉरवर्ड’ ने एक बयान में इस फैसले का स्वागत किया। ग्रुप के वकील स्टीव ब्रेसलर ने कहा, ‘आज का फैसला उस सिस्टम की रक्षा करता है जो रातों-रात अव्यवस्था का शिकार हो गया था।’
H-1B वीजा की कितनी रही है फीस?
H-1B वीजा के जरिए कंपनियां टेक, हेल्थकेयर, एजुकेशन समेत कई सारे फील्ड में स्पेशलिस्ट लोगों की हायरिंग करती हैं। इस वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल टेक कंपनियां करती आई हैं। ट्रंप की नई फीस की वजह से हायरिंग महंगी हो गई थी। आमतौर पर H-1B वीजा से जुड़ी फीस 2 हजार से 5 हजार डॉलर के बीच रहती है। नई फीस की वजह से अमेरिकी कंपनियों ने हायरिंग का तरीका बदला था और वे अमेरिका में ही लोगों को नौकरी देने लगी थीं।















