रूटीन में मैदा से बनी चीजें खाना, ज्यादा शुगर और तेल का सेवन करना और शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना लिवर की सेहत पर भारी पड़ सकता है। खराब खानपान और लाइफस्टाइल के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक डाइट में फाइबर, प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। वहीं तली-भुनी और ज्यादा कैलोरी वाली चीजों से दूरी बनाना जरूरी है।
फैटी लिवर को लेकर डॉक्टर हर्ष कपूर, चेयरमैन, हेपेटोलॉजी एवं गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने आलू के सेवन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फैटी लिवर के मरीजों के लिए आलू को सीधे तौर पर नुकसानदायक या जहर कहना सही नहीं है। समस्या मुख्य रूप से आलू की मात्रा और उसे पकाने के तरीके से जुड़ी होती है।
आलू में कार्बोहाइड्रेट और स्टार्च की मात्रा अधिक होती है। ऐसे में फैटी लिवर से जूझ रहा व्यक्ति अगर रोजाना बड़ी मात्रा में आलू खाता है या फ्रेंच फ्राइज, चिप्स और ज्यादा तेल-मसाले वाली आलू की सब्जी का सेवन करता है, तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ सकती है। इससे वजन और ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है, जो फैटी लिवर की स्थिति को बिगाड़ने में भूमिका निभा सकता है।
हालांकि फैटी लिवर वाले व्यक्ति को आलू पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है। उबला हुआ या कम तेल में पकाया गया आलू सीमित मात्रा में खाया जा सकता है। इसे हरी सब्जियों, दाल, सलाद और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों के साथ लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
फैटी लिवर में केवल आलू पर ध्यान देने के बजाय पूरी डाइट और लाइफस्टाइल को सुधारना जरूरी है। कुल कैलोरी, वजन, शुगर और तेल-चर्बी वाले खाद्य पदार्थों पर नियंत्रण रखना चाहिए। अपनी स्थिति के अनुसार डाइट प्लान के लिए डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर रहेगा।















