रूस से भारत के कच्चे तेल आयात में गिरावट,

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बीते महीने मन की बात कही थी। उन्‍होंने भारत और रूस के बीच व्यापार फिर से बढ़ने का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी को दिया था।माना था कि दोनों देशों के और बेहतर होते रिश्तों की वजह प्रधानमंत्री मोदी का इसे लेकर ‘व्यक्तिगत ध्यान’ देना है। लेकिन, अब ऐसे आंकड़े आए हैं जिनसे पिक्चर बदलती दिख रही है। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों की ओर से अपनी खरीद में विविधता लाने के कारण सितंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 17.5 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। यह अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है।

मॉस्को में पुतिन और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अगस्त में मुलाकात हुई थी। पुतिन ने कहा था, ‘मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि इस साल हमारे व्यापार का कुल मूल्य बढ़ा है। पिछले साल इसमें थोड़ी गिरावट आई थी। लेकिन, इस साल यह बढ़ रहा है। इसका कुछ हद तक और शायद मुख्य रूप से श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। वह रूस-भारत संबंधों को बेहतर बनाने पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दे रहे हैं।

सीन हुआ चेंज

ग्लोबल कमोडिटी डेटा और विश्लेषण फर्म केप्लर के मुताबिक, सितंबर में भारत का कुल कच्चा तेल आयात औसतन करीब 53 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) रहा। यह अगस्त की तुलना में लगभग छह लाख बैरल प्रतिदिन और एक साल पहले की समान अवधि से सात लाख बैरल प्रतिदिन अधिक है।

भारत ने सितंबर में औसतन 17.4 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चे तेल का आयात किया। यह आयात अप्रैल के 15.8 लाख बैरल प्रतिदिन के बाद सबसे कम है। इसकी तुलना में भारत ने अगस्त में रूस से 20.2 लाख बैरल प्रतिदिन और जुलाई में 26.5 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया था।

इराक और सऊदी अरब ने की भरपाई

रूस से घटे आयात की भरपाई इराक और सऊदी अरब ने की। इराक ने इस महीने लगभग 5.75 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की सप्लाई की, जो अगस्त में 1.63 लाख बैरल प्रतिदिन थी। इसी तरह सऊदी अरब से आपूर्ति भी अगस्त के 3.47 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर सितंबर में 5.66 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आपूर्ति अगस्त के 5.46 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर 4.80 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई।केप्लर में मॉडलिंग के वरिष्ठ प्रबंधक सुमित रितोलिया ने कहा कि रूसी आपूर्ति में यह कमी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका रूसी तेल के खरीदारों पर दबाव बनाना जारी रखे हुए है। इसके चलते भारतीय रिफाइनरी इकाइयों ने अपने आपूर्ति स्रोतों के विकल्पों को लचीला बनाए रखा है।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद रूस, भारत के कच्चे तेल के एक बड़े हिस्से की आपूर्ति कर रहा है और खरीद के फैसले मुख्य रूप से आर्थिक लाभ, उपलब्धता तथा रिफाइनरी अनुकूलता के आधार पर तय हो रहे हैं।

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