अगर आपको लगता है कि रोटी सिर्फ गेहूं के आटे से तैयार की जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है आप डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी के बताए ऑप्शन को अपने रूटीन में शामिल कर सकते हैं. कुछ ही दिनों में आपको काफी फर्क महसूस नजर आ सकता है.भारतीय घरों में रोटी बनाने के लिए सबसे ज्यादा गेहूं के आटे का इस्तेमाल किया जाता है. सुबह, दोपहर या फिर रात को गेहूं की रोटी ही खाई जाती है. गेहूं का आटा कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का स्रोत हो सकता है. लेकिन पहले ऐसा नहीं था, क्योंकि डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने बताया है कि पहले लोग मौसम के हिसाब से रोटी खाया करते थे. इसलिए वो हेल्दी रहते थे और किसी भी तरह की बीमारी नहीं होती थी. ऐसे में अगर आप भी अपनी डाइट में थोड़ा बदलाव करना चाहते हैं तो गेहूं के अलावा भी कई तरह के आटे रोटी या दूसरे व्यंजनों में शामिल किए जा सकते हैं. ये ऑप्शन कौन से हैं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.
राजगिरा का आटा
रागी यानी फिंगर मिलेट कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसके अलावा, इसमें फाइबर और कुछ जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं. रागी के आटे का इस्तेमाल रोटी, डोसा, चीला और दूसरे व्यंजनों में किया जा सकता है. यह आटा आपको आसानी से मार्केट में मिल जाएगा, जिसे घर में स्टोर करके रखा जा सकता है. आप इस आटे का इस्तेमाल नाश्ता बनाने के लिए कर सकते हैं.
सिंघाड़े का आटा
आप सिंघाड़े का आटा अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं. इससे पाचन को बहुत ही फायदा मिलता है, जिसे खाने पर हल्का महसूस होता है. इसलिए फलाहारी व्यंजन में इसका इस्तेमाल किया जाता है. ग्लूटेन फ्री इस आटे से आप पूड़ी, रोटी, हलवा या रोटी तैयार करके खा सकते हैं. बाकी दिनों में आप इसका इस्तेमाल पकोड़े को क्रिस्पी बनाने के लिए कर सकते हैं.
कुट्टू का आटा
कुट्टू का आटा खासतौर पर व्रत के दौरान इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे सिर्फ व्रत तक रखने की जरूरत नहीं है. कुट्टू में फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस आटे को भी अलग-अलग तरह के अनाज और मिलेट्स के साथ बदल-बदलकर डाइट में शामिल किया जा सकता है. आपको यह बहुत ही आसानी से मार्केट में मिल जाएगा, जिसे अपने बजट के हिसाब से खरीदा जा सकता है.
बाजरे का आटा
बाजरा एक मिलेट है और इसमें फाइबर, प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. बाजरे के आटे से बनी रोटी सर्दियों में खास तौर पर खूब खाई जाती है. इसे गेहूं के आटे के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. फाइबर की मौजूदगी इसे पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने वाली डाइट का हिस्सा बना सकती है. वजन कम करने वालों के लिए ये बेस्ट माना जाता है.
जौ का आटा
जौ के दानों को पीसकर बनाया गया यह आटा पौष्टिकता से भरपूर होता है. हेल्थ को इसके बहुत ही फायदे मिल सकते हैं और शुगर वालों के लिए इसकी रोटी काफी अच्छी मानी जाती है. पेट के लिए भी यह आटा बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. इसलिए आप इसकी रोटी, पराठे या फिर चीला बनाकर खा सकते हैं. हालांकि, इसकी रोटी बनाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है तो बेहतर होगा कि इसके साथ गेहूं का आटा मिलाएं.
रागी का आटा
आप रागी का आटा अपने आहार में शामिल कर सकते हैं. रागी का आटा जिसे नाचनी या मंडुआ भी कहते हैं. बता दें रागी कैल्शियम, फाइबर, आयरन और प्रोटीन से भरपूर एक पौष्टिक सुपरफूड है. अगर इसे नियमित रूप से खाया जाए तो फायदा हो सकता है, लेकिन अगर आपको कोई बीमारी है तो रोजाना इसके सेवन से आपको बचना चाहिए और डॉक्टर से पूछना चाहिए.















