कोल्हू संचालकों को प्रतिबंधित ईंधन से बचने और पर्यावरण मानकों के पालन के निर्देश.

मुजफ्फरनगर। जिलाधिकारी (प्रशासन) देश दीपक सिंह की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभागार में जनपद के कोल्हू एवं खांडसारी इकाई संचालकों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला खांडसारी अधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, सहायक पर्यावरण अभियंता सहित संबंधित अधिकारी एवं इकाई संचालक मौजूद रहे। बैठक में आगामी पेराई सत्र के दौरान वायु प्रदूषण की रोकथाम और पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में बताया गया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार कोल्हू एवं खांडसारी इकाइयों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए भू-तल से लगभग 10 मीटर ऊंची चिमनी स्थापित किया जाना आवश्यक है। इकाइयों के संचालन में केवल अनुमन्य ईंधन जैसे बैगास, बायोमास, बायोब्रिकेट तथा सूखे कृषि अपशिष्ट, जिसमें गेहूं व धान का भूसा और गन्ने का सूखा अपशिष्ट शामिल है, का ही प्रयोग किया जाए।

संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्लास्टिक, टायर, रबर आदि प्रतिबंधित ईंधन का किसी भी स्थिति में इस्तेमाल न किया जाए। ऐसे ईंधन के जलने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ कर्मचारियों और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल होने के कारण मुजफ्फरनगर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों का पालन अनिवार्य है।

बैठक में बताया गया कि कोल्हू संचालकों को राज्य बोर्ड से सहमति लेना आवश्यक है। इसके लिए निवेश मित्र पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है और राज्य बोर्ड द्वारा पांच वर्ष की सहमति जारी की जाएगी। जिलाधिकारी (प्रशासन) ने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक इकाई संचालक की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी संचालकों से पेराई सत्र शुरू होने से पहले पर्यावरणीय मानकों का शत-प्रतिशत पालन करने और प्रतिबंधित ईंधन के दहन से पूरी तरह बचने का आह्वान किया।

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts