महिलाओं को क्यों टाइम से पहले हो रहा मेनोपॉज?

मेनोपॉज महिलाओं में होने वाली एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जब 45 के बाद की उम्र में पीरियड्स धीरे-धीरे आना कम हो जाते हैं. शुरुआती फेज को प्री-मेनोपॉज के नाम से जाना जाता है. ये प्रोसेस तकरीबन 1 से डेढ़ साल तक चलता है और इसके बाद पीरियड्स पूरी तरह से बंद हो जाते हैं. महिलाओं को इस दौरान और इसके बाद अपनी सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है. दरअसल हार्मोनल चेंज के अलावा पीरियड साइकिल बंद होने के बाद कई तरह की दिक्कतें भी होने लगती हैं और अगर प्रीमेच्योर मेनोपॉज (समय से पहले) हो जाए तो न सिर्फ फर्टिलिटी की चिंता बढ़ती है, बल्कि स्वास्थ पर भी असर होता है.प्रीमेच्योर मेनोपॉज की वजह से उम्र से पहले ही एस्ट्रोजन और बाकी हार्मोन की कमी होने लगती है, इस वजह से सेहत से जुड़े जोखिम बढ़ते हैं, जैसे हड्डियों का कमजोर होना, हार्ट पर असर, बार-बार यूरिन इंफेक्शन हो जाना, मूड में बदलाव होना. एक्सपर्ट से जान लेते हैं कि क्या हैं इसके कारण.

प्रीमेच्योर मेनोपॉज किसे कहते हैं?

उत्तर प्रदेश के हेल्थ और फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट की MBBS, MS गायकनोलॉजिस्ट डॉक्टर मीरा पाठक का कहना है कि मेनोपॉज महिलाओं की लाइफ में एक ऐसा स्टेज है जब ओवरी का फंक्शन खत्म हो जाता है यानी ओवरी में एग्स और सेक्स हार्मोन बनना बंद हो जाते हैं. इस फेज के अंदर जब महिलाओं को एक साल तक पीरियड्स नहीं आते हैं तो उसे मेनोपॉज कहा जाता है. इसकी ऐवरेज एज 45 से 55 साल तक होता है, लेकिन जब 40 से 45 साल की उम्र में पीरियड्स आना बंद हो जाए तो ये अर्ली मेनोपॉज (उम्र से पहले) कहलाता है.

ट्रीटमेंट के कारण प्रीमेच्योर मेनोपॉज

एक्सपर्ट कहती हैं कि अगर समय से पहले पीरियड्स आना बंद हो जाएं तो इसे प्रीमेच्योर ओवेरियन फेलियर या प्राइमरी ओवेरियन इनसफिशिएंसी कहा जाता है. अगर हम बात करते हैं 40 साल के अंदर मेनोपॉज होना तो इसके कारण ज्यादातर आइट्रोजेनिक होते हैं यानी ट्रीटमेंट से संबंधित. जैसे कि किसी कारणवश हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy) के वक्त ओवरी को रिमूव करना पड़ जाए तो पीरियड्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं.हिस्टेरेक्टॉमी एक सर्जिकल प्रोसेस होता है जो तब किया जाता है जब गर्भाशय फाइब्रॉएड (गर्भाशयम में कैंसरयुक्त गांठ या कोई और गंभीर गांठ होना), असामान्य ब्लीडिंग होना या फिर गर्भाशय का खिसक जाना (Uterine Prolapse) या फिर एंडोमेट्रियोसिस और एडिनोमायोसिस जैसी समस्याएं हो रही हो. इसके अलावा कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी का भी कई बार ओवरी पर असर पड़ता है. ऐसी कंडीशन्स में ट्रीटमेंट वजह से अर्ली मेनोपॉज यानी समय से पहले पीरियड्स बंद होने की समस्या हो सकती है.

प्रीमेच्योर मेनोपॉज के संभावित कारण

डॉक्टर मीरा पाठक का कहना है कि अगर स्वास्थ समस्या से जुड़े कारणों को अगर हटा दिया जाए तो बचे हुए मामलों के अंदर 70 से 90 प्रतिशत केस में ये नहीं पता चलता है कि समय से पहले पीरियड्स बंद होने का सटीक कारण क्या है. बाकी बचे हुए मामलों में आमतौर पर जो वजहें होती हैं उसमें सबसे पहला है जेनेटिक कारण. इसमें जिसमें कोई जेनेटिक (परिवार की किसी महिला को पहले ये समस्या रही हो जैसे मां या दादी) या फिर क्रोमोसोमल एब्नार्मेलिटीज (गुणसूत्रों की संख्या या संरचना में गड़बड़ी) होती हैं जिसके कारण महिला की ओवरीज जल्दी लूज हो जाती हैं और ओवेरियन फंक्शन जल्दी खत्म हो जाते हैं.

ऑटोइम्यून डिसऑर्डर होना

अर्ली मेनोपॉज के कारणों की बात करें तो दूसरी वजह इसमें रूमेटॉइड आर्थराइटिस होना, या एसएलई (सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस) होना. ये भी एक ऑटोइम्यून क्रोनिक (लंबे समय तक रहने वाली प्रॉब्लम) बीमारी है. इसके अलावा कुछ दवाएं, जैसे साइक्लोफॉस्फेमाइड (Cyclophosphamide) खाना. इसकी वजह से भी ओवेरियन फंक्शन डिस्टर्ब हो सकता है.

लाइफस्टाइल से जुड़े कारण क्या हैं?

जिनमें प्रीमेच्योर मेनोपॉज के कारणों का पता नहीं लग पाता है, उन मामलों के बारे में बात करते हुए डॉक्टर मीरा पाठक कहती हैं कि ज्यादातर ऐसे मामलों में एपीजेनेटिक कारण होते हैं यानी लाइफस्टाइल या पर्यावरण में होने वाले बुरे बदलावों का असर हमारे जीन्स पर पड़ता है और ये जीन्स को स्विचऑन या ऑफ कर सकता है.

अगर हम ऐसे फैक्टर्स की बात करें तो इसमें स्मोकिंग भी एक कारण होता है. जब महिलाएं स्मोक (सिगरेट पीना) करती हैं तो उनके अंदर मेनोपॉज उम्र से एक साल पहले हो सकता है. दूसरा लाइफस्टाइल फैक्टर है ओवरवेट होना या फिर मोटापा. ऐसे में मेटाबॉलिक सिंड्रोम हो सकता है. उसकी वजह से ओवेरियन फेलियर होने के चांस रहते हैं. इसमें तीसरी वजह है स्ट्रेस ज्यादा होना. जब स्ट्रेस होता है तो इससे कार्टिसोल हार्मोन बढ़ते हैं और इससे हार्मोनल इंबैलेंस हो जाता है. इसी तरह से जब नींद का ध्यान नहीं रहते हैं तो हमारा बायोलॉजिकल साइकिल डिस्टर्ब हो जाता है. इस कारण से भी महिलाओं में प्राइमरी ओवेरियन इनसफिशिएंसी होने की संभावना बढ़ती है.

ये भी हैं वजहें

खाने में मिलावट होना, एनवायरमेंट में बढ़ता प्रदूषण, खाने में माइक्रोप्लास्टिक होना. ये सारी चीजें शरीर में हार्मोन को भी इंबैलेंस कर सकती हैं और इस वजह से भी कहीं न कहीं जल्दी मेनोपॉज हो सकता है.

दो तरह का प्रीमेच्योर मेनोपॉज

अगर हम इसे डिफ्रेंशिएट करें तो पेरिमेनोपॉज ये एक ऐसा फेज होता है जब मेनोपॉज से पहले आता है यानी रिप्रोडक्टिव एज ग्रुप से जब लेडी मेनोपॉज में एंटर करती है तो ऐसी कंडीशन में पीरियड्स इररेगुलर हो जाते हैं. इसमें ऐसा भी हो सकता है कि तीन महीने में एक बार पीरियड्स आएं या फिर एक महीने में तीन बार पीरियड्स भी हो सकते हैं. ऐसे में कई बार महिलाओं को लगता है कि उनका मेनोपॉज शुरी हो गया है. जरूरी है कि ब्लड टेस्ट कराएं ताकि ये पता किया जा सके कि ये प्रीमेच्योर ओवेरियन फेलियर तो नहीं है.

टेम्परेरी ओवेरियन फेलियर क्या है?

दूसरी कंडीशन है कि टेम्परेरी ओवेरियन फेलियर होना. इसमें कुछ समय के लिए ओवरी के फंक्शन बंद हो जाते हैं. ये ज्यादातर तब होता है जब स्ट्रेस बहुत ज्यादा हो, नींद का पैटर्न बिगड़ा हुआ हो या फिर आजकल जो सबसे ज्यादा देखने में आ रहा है कि जल्दी-जल्दी वेट लॉस करते हैं और बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने लगते हैं. इन फैक्टर की वजह और कैलोरी डिप्लिजन के कारण रिप्रोडक्टिव सिस्टम पर असर पड़ता है. ऐसे में भी हो सकता है कि ऐसे में कुछ समय के लिए पीरियड्स रुक जाएं, लेकिन इन कंडीशन में जब आप वापस नॉर्मल लाइफस्टाइल में आ जाती हैं तो ये सही हो जाता है.

सेहत का रखें ख्याल

एक्सपर्ट का कहना है कि महिलाएं अपनी लाइफस्टाइल का ध्यान रखें जैसे डाइट में सुधार करें, नियमित रूप से हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करती रहें. स्मोकिंग करना, या अल्कोहल लेना जैसी आदतों से दूर रहें, स्ट्रेस से बचें और बढ़िया नींद लें. डाइट संतुलित रखें, वजन को कंट्रोल करें और अपनी सेहत का ख्याल रखें तो प्रीमेच्योर मेनोपॉज की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है.

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