राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मंगलवार को बीकानेर के नाल पहुंचे, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। नाल में आयोजित एक जनसभा के दौरान जैसे ही गहलोत ने संबोधन शुरू करते हुए कहा कि ‘आप लोगों के आशीर्वाद से मैं 3 बार मुख्यमंत्री बना’, वैसे ही पांडाल में मौजूद समर्थकों ने ‘चौथी बार अशोक गहलोत सरकार’ के गगनभेदी नारे लगाने शुरू कर दिए।इस पर पूर्व मुख्यमंत्री ने समर्थकों को बीच में ही रोक दिया और नसीहत देते हुए कहा, ‘आप लोग ऐसे नारे मत लगाओ, इससे हमारे बीच गलतफहमी पैदा होती है। मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह फैसला आलाकमान करता है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी तय करेंगे कि नेतृत्व किसे सौंपना है।’
शोक संतप्त परिवार को बंधाया ढांस
नाल एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं द्वारा स्वागत के बाद गहलोत ने स्थानीय लोगों और पत्रकारों से बातचीत की। इसके बाद वे हदां पहुंचे, जहां उन्होंने पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी के पिता रघुनाथ सिंह भाटी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और परिजनों को सांत्वना दी।
सूखा प्रभावित किसानों के लिए राहत की मांग
किसानों के मुद्दों पर बात करते हुए पूर्व सीएम ने सरकार से तुरंत राहत पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की समस्याएं बेहद गंभीर हैं। सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह धरातल पर जाकर स्थिति का सही आकलन करे और किसानों को जरूरत के अनुसार मुआवजा और सहायता उपलब्ध कराए। गहलोत ने घोषणा की कि वे बुधवार (14 अक्टूबर) को श्रीडूंगरगढ़ जाकर सूखा प्रभावित किसानों से सीधा संवाद करेंगे।
‘कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं, सभी नेता एक हैं’
संगठन में एकजुटता का संदेश देते हुए गहलोत ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस के सभी नेता और कार्यकर्ता पूरी तरह एकजुट हैं। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली मिलकर बेहतरीन काम कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है और मौजूदा राजनीतिक व सामाजिक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सभी को सामूहिक रूप से संघर्ष करना होगा।
चुनाव प्रक्रिया और युवाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरा
राहुल गांधी द्वारा उठाए गए ‘वोट चोरी’ के मुद्दे का समर्थन करते हुए गहलोत ने कहा कि हरियाणा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के चुनावों में मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और फॉर्म-6 के इस्तेमाल में सावधानी बरती जानी चाहिए।















