मेरठ। अब पेट्रोल पंपों पर प्रदूषण प्रमाण-पत्र नहीं लेने वाले वाहनों को डीजल-पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। खाद्य विभाग ने 30 सितंबर तक सभी पेट्रोल पंपों पर आटोमेटिक नंबर प्लेट रिकगनेशन (एएनपीआर) कैमरे लगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।एएनपीआर कैमरा जैसे ही उक्त वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र अवैध दिखाएगा तो उसे पेट्रोल पंप वाले ईंधन नहीं देंगे।
शासन के निर्देश के बावजूद पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे लगाने में लापरवाही सामने आई है। जिले में महज 14 पंपों पर ही अब तक यह कैमरा सिस्टम लगा है। शेष पंप संचालकों ने कोई पहल नहीं की। इसे देखते हुए जिला पूर्ति विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत मोबाइल एप के जरिए भी प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) की जांच अनिवार्य करने का फैसला लिया है।जिला पूर्ति अधिकारी ने इस बाबत सभी पेट्रोल पंप संचालकों को कहा है कि वे अपने कर्मचारियों के मोबाइल फोन में निर्धारित एप इंस्टाल कराएं। हर वाहन को ईंधन देने से पहले उसका पंजीकरण नंबर डालकर पीयूसी वैधता की पुष्टि करें। एप में वाहन नंबर दर्ज करते ही पता चल जाएगा कि संबंधित वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र वैध है या उसकी अवधि समाप्त हो चुकी है। यह मोबाइल एप वाहन पोर्टल से संबद्ध होगा। दरअसल, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन शहरी प्रदूषण के प्रमुख कारणों में गिना जाता है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना वैध पीयूसी प्रमाण पत्र के वाहन चलाना दंडनीय अपराध है। एनसीआर में अब वायु प्रदूषण को लेकर लगातार सख्ती बढ़ती जा रही है। एएनपीआर कैमरे इसी उद्देश्य के लिए लगाए जाने थे, ताकि वाहन का नंबर स्कैन होने के बाद सिस्टम से जुड़े डाटा से इसका मिलान हो सके।
जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि मोबाइल एप व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। मेरठ पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश जैन ने कहा कि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर मोबाइल एप अपडेट करा दिया गया है। पंपों पर बैनर भी लगाए जाएंगे ताकि ग्राहक इस अनिवार्यता में सहयोग करें।















