शामली। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने शुक्रवार को शामली कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। संगठन ने गन्ना किसानों की बढ़ती लागत और चीनी के बाजार मूल्य में वृद्धि का हवाला देते हुए गन्ने का उचित मूल्य निर्धारित करने की मांग उठाई।
जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना केवल एक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रदेश के लगभग 48 लाख गन्ना किसान परिवार प्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। इसके अलावा कृषि मजदूरों, परिवहन कारोबारियों, चीनी मिलों, कोल्हू और गुड़ उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका भी गन्ने पर निर्भर है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मजदूरी की लागत लगातार बढ़ी है, लेकिन गन्ने के मूल्य में लागत के अनुपात में वृद्धि नहीं हुई। दूसरी ओर, कई क्षेत्रों में कोल्हुओं द्वारा चीनी मिलों की निर्धारित दर से अधिक कीमत पर गन्ने की खरीद की जा रही है। इससे किसानों को उचित मूल्य देने की मांग और मजबूत होती है।
रविंद्र राणा ने चीनी के खुदरा मूल्य में वृद्धि का हवाला देते हुए बताया कि केंद्र सरकार के 21 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई से 20 अगस्त 2026 के बीच चीनी का औसत खुदरा मूल्य 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। उन्होंने कहा कि चीनी, एथेनॉल, शीरा और अन्य उप-उत्पादों से होने वाली आय को ध्यान में रखकर गन्ना मूल्य का निष्पक्ष निर्धारण किया जाना चाहिए।
संगठन ने 16 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत प्रदर्शन कर सरकार से गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति और बढ़ती कृषि लागत को ध्यान में रखते हुए उचित मूल्य घोषित करने की मांग की।















