मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 5 जून से 21 जून 2026 तक संचालित “सेवा, संस्कार, सुशासन एवं सम्मान” आधारित समेकित जन-कल्याण एवं जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत खेत बचाओ अभियान के तहत विकसित कृषि संकल्प अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान के माध्यम से जिले के विभिन्न विकास खंडों की छह ग्राम पंचायतों में किसानों को कृषि संबंधी आधुनिक तकनीकों, सरकारी योजनाओं तथा प्राकृतिक खेती के महत्व की जानकारी देकर जागरूक किया गया। कार्यक्रम विकास खंड खतौली के भंगायी चंदसीना, विकास खंड पुरकाजी के शेरपुर और तुगलकपुर तथा विकास खंड जानसठ के मेंहलकी और सलारपुर सहित अन्य गांवों में आयोजित किया गया।
कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि विज्ञान केंद्र चितौड़ा के वैज्ञानिकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने किसानों को उन्नत खेती, मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण और फसल उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी। उप कृषि निदेशक प्रमोद सिरोही ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए उनकी समस्याओं और जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खेती, तकनीकी नवाचार और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
कार्यक्रम में कम्प्लायंस कार्ट प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा की ओर से डॉ. एकता मिश्रा ने किसान समृद्धि कार्बन क्रेडिट योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाकर किसान कार्बन क्रेडिट के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। वहीं डॉ. पूजा ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कृषि रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मृदा, जलवायु और जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ जैविक अनाज उत्पादन के लाभ भी बताए।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरी खाद, जैव उर्वरकों, मृदा सुधार, जल प्रबंधन तथा उन्नत कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। मनोज कुमार ने मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रयोग करने की सलाह दी, जबकि शुभम ने ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई के लाभ बताए। वहीं संदीप कुमार ने बीज शोधन और समय पर बुवाई के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर विशेषज्ञों से संवाद किया और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। अभियान का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर, जागरूक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति प्रेरित करना रहा।























































