मुजफ्फरनगर में जनसुनवाई और आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम) पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में लंबित प्रकरण, डिफाल्टर संदर्भ और शिकायतकर्ताओं से संतोषजनक फीडबैक न मिलने पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है तथा इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
समीक्षा के बाद जिलाधिकारी ने कार्य में घोर लापरवाही पाए जाने पर 11 अधिकारियों को कठोर चेतावनी जारी की है। इनमें सदर, बुढाना और जानसठ के उपजिलाधिकारी, उप निदेशक कृषि प्रसार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी, नगर पंचायत चरथावल और सिसौली के अधिशासी अधिकारी, शाहपुर के खंड विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी तथा नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर के अधिशासी अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा कई विभागों के अधिकारियों के स्तर पर शिकायतों के निस्तारण में अत्यधिक विलंब और उदासीनता पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित समय के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
नोटिस प्राप्त करने वाले अधिकारियों में विद्युत वितरण खंड खतौली के अधिशासी अभियंता, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी, चरथावल, जानसठ, पुरकाजी, मुजफ्फरनगर और मोरना के खंड शिक्षा अधिकारी, मुजफ्फरनगर के खंड विकास अधिकारी, खतौली और सदर के चकबंदी अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, खतौली और चरथावल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी एवं अधीक्षक, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी, पुरकाजी की बाल विकास परियोजना अधिकारी, जानसठ के सब रजिस्ट्रार, लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता तथा सहायक विकास अधिकारी शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि आम जनता की शिकायतों का समय पर और प्रभावी समाधान प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और निस्तारण रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी और उनके सेवा अभिलेखों में प्रतिकूल प्रविष्टि भी दर्ज की जा सकती है। साथ ही सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि मौके पर जाकर शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करें। इससे प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी और आम लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।























































