भारत के अंतरिम हेड कोच वीवीएस लक्ष्मण ने रविवार को कहा कि पिछले छह महीनों में वैभव सूर्यवंशी की गेम की समझ (गेम अवेयरनेस) में जबरदस्त सुधार हुआ है.इस युवा बल्लेबाज़ की बढ़ती परिपक्वता (मैच्योरिटी) उन्हें अपने इंटरनेशनल करियर की शुरुआत में ही दबाव वाली स्थितियों को संभालने में मदद कर रही है. 15 साल के इस खिलाड़ी ने अपने आलोचकों का मुंह जबरदस्त तरीके से बंद कर दिया. उन्होंने एक यादगार दौरे का समापन ‘प्लेयर ऑफ़ द मैच’ और ‘प्लेयर ऑफ़ द सीरीज’ दोनों अवॉर्ड जीतकर किया. भारत ने रविवार को आखिरी T20I में 35 रन से जीत हासिल कर ज़िम्बाब्वे के खिलाफ सीरीज़ 3-0 से जीती.
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में लक्ष्मण ने कहा, “सबसे प्रभावशाली बात यह है कि एक व्यक्ति के तौर पर उनमें कितना बदलाव आया है. पिछले छह महीनों में उनकी परिपक्वता, समझ और गेम की जानकारी में जबरदस्त सुधार हुआ है. और इसीलिए वह मुश्किल स्थितियों को संभालने में कामयाब रहे हैं.” सूर्यवंशी ने तीन पारियों में 50.33 की औसत से 151 रन बनाए. सीरीज के आखिरी मैच में उनकी शानदार 81 रनों की पारी ने भारत की जीत की नींव रखी.
यह सब इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एक निराशाजनक डेब्यू सीरीज के बाद हुआ, जिसमें वह 13, 14 और 15 रन ही बना पाए थे और उन्हें पांचवें और आखिरी T20I से बाहर कर दिया गया था, जबकि भारत को उस सीरीज़ में 0-4 से हार का सामना करना पड़ा था. “उन्होंने अंडर-19 वर्ल्ड कप खेला और चार-पांच महीनों में ही IPL में छा गए. हम जानते हैं कि IPL में मुकाबला कितना कड़ा होता है.
“भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के बेहतरीन गेंदबाज़ों का सामना करते हुए, जिस तरह से उन्होंने खुद को बेहतर बनाया, एक इंटरनेशनल क्रिकेटर के तौर पर आगे बढ़े और दिखाया कि उनमें कितनी काबिलियत, क्लास और टैलेंट है,” लक्ष्मण ने कहा. लक्ष्मण अभी अंतरिम हेड कोच की भूमिका निभा रहे हैं, ताकि गौतम गंभीर को अगले महीने श्रीलंका के खिलाफ़ होने वाले दो टेस्ट मैचों के दौरे से पहले कुछ आराम मिल सके.
लक्ष्मण ने आगे कहा कि पूरी सीरीज के दौरान सूर्यवंशी के रवैये में बेहतर करने की भूख साफ दिखी. उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब चोट लगने के बावजूद यह युवा खिलाड़ी मैदान पर बने रहने और टीम के लिए योगदान देने को लेकर उत्सुक था.
“हमें यह भी याद रखना चाहिए कि वह सिर्फ 15 साल के हैं. वह बहुत छोटा बच्चा है और वह खुद खेल के हर पहलू में बेहतर होना चाहता है और अगर आप देखें, तो आज के मैच में भी वह ‘हॉट स्पॉट’ पर थे. चोट लगने के बावजूद वह मैदान पर बने रहना चाहता था. लेकिन हमारे फिजियो ने ही उसे बाहर आने के लिए कहा. तो, टीम के लिए हर संभव तरीके से योगदान देने की उनमें यही उत्सुकता और लगन है,” लक्ष्मण ने कहा.
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें इंग्लैंड में सूर्यवंशी के इंटरनेशनल करियर की कमज़ोर शुरुआत (जहां उन्हें टीम से बाहर किए जाने से पहले सिर्फ तीन साधारण स्कोर मिले थे) के बाद इतनी जबरदस्त वापसी की उम्मीद थी, तो लक्ष्मण ने कहा कि उन्हें इस युवा खिलाड़ी की वापसी की क्षमता पर कभी शक नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने IPL में दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन करने का जज़्बा बार-बार दिखाया था.
“वह शतक न बना पाने से निराश थे. लेकिन हमने उनसे कहा कि यह न तो पहली बार था और न ही आखिरी बार जब उन्हें शतक बनाने का मौका मिलेगा. उनका करियर अभी लंबा है और उनमें हर दिन बेहतर बनने का एटीट्यूड और माइंडसेट है. और मुझे यकीन है कि वह आगे बढ़ेंगे और इंटरनेशनल लेवल पर सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगे. उनमें ऐसा करने की पूरी क्षमता और काबिलियत है,” लक्ष्मण ने कहा.
लक्ष्मण ने कहा कि भारत का मज़बूत क्रिकेटिंग इकोसिस्टम और टैलेंट पाइपलाइन अगले दशक में भी बेहतरीन खिलाड़ी तैयार करते रहेंगे.
“हम बहुत खुशकिस्मत हैं कि हमारे इकोसिस्टम में बहुत गहराई है. और मुझे लगता है कि अगले पांच से 10 सालों तक हमारे पास बहुत सारे बेहतरीन खिलाड़ी होंगे जो भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाएंगे. मुझे लगता है कि हम वैभव को बहुत अच्छी तरह जानते हैं.”























































