मुजफ्फरनगर। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, मुजफ्फरनगर-द्वितीय के प्रांगण में गुरुवार को फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के तहत जिला स्तरीय जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पराली और अन्य फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान तथा उनके वैज्ञानिक प्रबंधन के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. यशपाल सिंह ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, कृषि विभाग के अधिकारियों, वैज्ञानिकों और किसानों का स्वागत करते हुए की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जानसठ ब्लॉक प्रमुख नरेंद्र सिंह रहे, जबकि अध्यक्षता जिला कृषि उपनिदेशक प्रमोद सिरोही ने की। सुरेंद्र सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
कार्यक्रम में परियोजना अन्वेषक डॉ. रीना ने फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर किसानों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने किसानों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं उचित प्रबंधन के विभिन्न तरीकों की जानकारी देते हुए इसके लाभ बताए। किसानों से अपील की गई कि वे पराली न जलाकर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में सहयोग करें।
इस दौरान संजीव कुमार ने भी किसानों को कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूजा ने किया। अभियान में जिले के विभिन्न गांवों से पहुंचे 200 से अधिक प्रगतिशील किसानों और पशुपालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में उत्तम राठी ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों और किसानों का आभार व्यक्त किया। अभियान को फसल अवशेष जलाने की प्रवृत्ति रोकने और कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।















