अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की पिकएक्स माउंटेन नाम की बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड साइट पर हमला करने की धमकी दी है. 4 सितंबर को ट्रंप ने कहा कि अगर यहां कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी तो अमेरिका इस जगह पर बहुत जल्द हमला कर सकता है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पिकएक्स माउंटेन पर आने-जाने वाली हर गतिविधि पर नजर रख रही हैंट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का मुख्य मकसद उसे परमाणु हथियार बनाने से रोकना है. उनका दावा है कि पांच महीने की कार्रवाई के बाद ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा.
कहां है पिकएक्स माउंटेन?
पिकएक्स माउंटेन को ईरान में कू-ए-कोलांग कहा जाता है. यह ईरान के सबसे बड़े यूरेनियम एनरिचमेंट सेंटर नतांज के ठीक दक्षिण में है. नतांज पर 2025 और 2026 में अमेरिका और इजराइल हमला कर चुके हैं. पिकएक्स माउंटेन पहाड़ के अंदर बनी एक बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड साइट है. इसमें दो गहरी सुरंगों वाले कॉम्प्लेक्स हैं. माना जाता है कि इसका मुख्य हिस्सा जमीन के करीब 100 मीटर नीचे हो सकता है. साइट पर सुरंगों के चार प्रवेश द्वार हैं, दो पूर्व और दो पश्चिम दिशा में.सैटेलाइट तस्वीरों से यहां लगातार निर्माण का संकेत मिलता है. 30 जून 2026 की तस्वीरों में पश्चिमी प्रवेश द्वार के पास निर्माण वाहन दिखाई दिए थे. हाल के महीनों में यहां जाने वाली सड़कों और सुरंगों के एंट्री पॉइंट पर भी काम जारी रहने की जानकारी सामने आई है.
ईरान के लिए इतनी अहम क्यों?
इस साइट को लेकर सबसे बड़ी चिंता ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी है. वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइली खुफिया एजेंसी का आकलन है कि ईरान ने यहां हजारों सेंट्रीफ्यूज पहुंचाए हैं. सेंट्रीफ्यूज का इस्तेमाल यूरेनियम को ज्यादा शुद्ध बनाने के लिए किया जाता है. दावे यह भी हैं कि ईरान ने अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का कुछ हिस्सा यहां रखा है. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 22 जुलाई को कहा था कि पिकएक्स माउंटेन में कोई परमाणु गतिविधि नहीं हो रही है.इस जगह का असली इस्तेमाल अभी पूरी तरह साफ नहीं है. माना जाता है कि इसे नतांज में 2020 में क्षतिग्रस्त हुई एडवांस सेंट्रीफ्यूज असेंबली इमारत के विकल्प के तौर पर बनाया जा रहा हो सकता है. सितंबर 2020 में ईरान के परमाणु संगठन के तत्कालीन प्रमुख अली अकबर सालेही ने नतांज के पास पहाड़ों में एक ज्यादा आधुनिक और बड़ी सुविधा बनाने की बात कही थी.
अमेरिका के लिए हमला आसान नहीं
पिकएक्स माउंटेन की सबसे बड़ी सुरक्षा उसकी गहराई है. यह ईरान की फोर्डो और नतांज न्यूक्लियर साइट से भी ज्यादा गहराई में हो सकती है. अमेरिका ने पिछले साल इन साइटों पर GBU-57 बंकर बस्टर बमों से हमला किया था. यह बम करीब 13,000 किलो का है और लगभग 18 मीटर कंक्रीट या 61 मीटर मिट्टी को भेद सकता है. फिर भी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे पिकएक्स माउंटेन को पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल होगा. साइट की गहराई और अंदर की सुरंगों का सही नक्शा उपलब्ध नहीं होने के कारण हर भूमिगत हिस्से को नष्ट करना बेहद कठिन है.
ट्रंप की धमकी क्यों अहम?
ट्रंप की नई धमकी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने हाल में ईरान के IRGC से जुड़े एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, समुद्री ठिकानों, बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता और संचार केंद्रों पर हमले किए हैं. अमेरिका का कहना है कि ये कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर ईरान की कथित हमले की कोशिशों के जवाब में की गई.
ईरान ने अमेरिकी हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और जवाब में पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की बात कही है. ऐसे में पिकएक्स माउंटेन पर हमला ईरान के परमाणु ढांचे के खिलाफ अमेरिकी अभियान को और बड़ा कर सकता है और तनाव बढ़ा सकता है.























































