यूरोपीय यूनियन की क्लाइमेट एजेंसी कॉपरनिकस के मुताबिक, अगस्त अब तक रिकॉर्ड किए गए सबसे गर्म महीनों में शामिल रहा. अगस्त का तापमान जुलाई 2023 के बराबर रहा. यानी दोनों महीने संयुक्त रूप से अब तक के सबसे गर्म महीने रहे. अगस्त में दुनिया का औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के समय की तुलना में 1.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा. यह उस 1.5 डिग्री की सीमा से ऊपर है, जिसे दुनिया के देशों ने जलवायु परिवर्तन के सबसे खतरनाक असर से बचने के लिए तय किया है.हालांकि, केवल एक महीने का तापमान 1.5 डिग्री से ऊपर होना यह नहीं बताता कि यह सीमा हमेशा के लिए पार हो गई है. लेकिन इससे बढ़ते तापमान का खतरा जरूर दिखता है. इस बढ़ती गर्मी के पीछे जलवायु परिवर्तन और अल नीनो दोनों को बड़ी वजह माना जा रहा है. अल नीनो प्रशांत महासागर में होने वाली एक प्राकृतिक घटना है. इसमें पूर्वी प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे समुद्र में जमा गर्मी वातावरण में पहुंचती है और करीब एक साल तक दुनिया का तापमान बढ़ सकता है.
तापमान पर असर अगले एक साल में दिखेगा
कॉपरनिकस के वैज्ञानिकों के मुताबिक, मौजूदा अल नीनो अभी और मजबूत हो रहा है. यह अब तक के सबसे ताकतवर अल नीनो में से एक बन सकता है. इसका दुनिया के तापमान पर सबसे ज्यादा असर अगले एक साल में देखने को मिल सकता है. ऐसे में तापमान के नए रिकॉर्ड अभी और बन सकते हैं.अगस्त के साथ पश्चिमी यूरोप ने भी अब तक की सबसे गर्म गर्मी दर्ज की. ब्रिटेन में 1884 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह सबसे गर्म गर्मी रही. ब्रिटेन के मौसम विभाग के अनुसार, इंसानों की वजह से हो रहे जलवायु परिवर्तन ने ऐसी गर्मी की संभावना करीब 130 गुना बढ़ा दी. इस गर्मी का लोगों पर भी बड़ा असर पड़ा. स्कूलों का काम प्रभावित हुआ, अस्पतालों पर दबाव बढ़ा, खेती को नुकसान हुआ और आग व सूखे की घटनाएं बढ़ीं.
यूरोप में 10 हजार से ज्यादा मौतें
वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रिटेन और यूरोप में गर्मी के कारण दसियों हजार लोगों की मौत हुई. कॉपरनिकस की डॉ. सामंथा बर्गेस ने अगस्त को दुनिया के जलवायु रिकॉर्ड में असाधारण महीना बताया. संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा कि ये रिकॉर्ड इंसानों के जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहने से पैदा हो रहे जलवायु संकट का साफ सबूत हैं. इंपीरियल कॉलेज लंदन की डॉ. क्लेयर बार्न्स ने कहा कि ऐसी गर्मी को सिर्फ न्यू नॉर्मल मानना ठीक नहीं है. जब तक जीवाश्म ईंधन जलाना बंद नहीं होगा, गर्मी के रिकॉर्ड टूटते रहेंगे और हालात और खराब होंगे.























































