रेत में खड़े हैं पानी वाले जहाज, हीटवेव से सूखा जर्मनी की नदी का पानी.

जर्मनी की सबसे अहम जलधारा राइन नदी इस साल की भीषण हीटवेव के आगे बुरी तरह हांफ रही है. हफ्तों से जारी सूखे और तेज गर्मी ने नदी का जलस्तर इतना नीचे गिरा दिया है कि जो जहाज कभी लहरों पर तैरते थे, अब सूखी रेतीली सतह पर खड़े नजर आ रहे हैं. कई जगहों पर नावें और डॉक पूरी तरह सूख चुके नदी तल पर पड़े हुए हैं, जो जर्मनी में जल-संकट की गंभीरता को साफ बयां कर रहे हैं. यह हाल सिर्फ तस्वीरों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था को झकझोर रहा है.

राइन नदी जर्मनी के अंदरूनी जलमार्ग शिपिंग की रीढ़ मानी जाती है, लेकिन पानी की लगातार घटती मात्रा ने इस पूरे तंत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है. जलस्तर जितना नीचे जा रहा है, मालवाहक जहाजों की क्षमता उतनी ही घटती जा रही है, क्योंकि जमीन से टकराने से बचने के लिए उन्हें बेहद कम भार लेकर चलना पड़ रहा है. नतीजा यह है कि उतनी ही मात्रा में सामान पहुंचाने के लिए जहाजों को पहले से कहीं ज्यादा चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ रही है और उद्योगों की सप्लाई चेन पर भी असर पड़ रहा है.

ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा पानी

बॉन के पास कुछ हिस्सों में जलस्तर घटकर मात्र 74 सेंटीमीटर रह गया है, जबकि बॉर्नहाइम-हर्सेल और हर्सेलर वर्थ नेचर रिजर्व के बीच राइन की एक शाखा तो लगभग पूरी तरह सूख चुकी है. सबसे चिंताजनक स्थिति कोब्लेंज और फ्रैंकफर्ट के बीच बसे कौब शहर की है, जहां 5 अगस्त को जलस्तर पहली बार महज 19 सेंटीमीटर दर्ज किया गया, कुछ समय के लिए यह 18 सेमी तक भी लुढ़क गया. कौब का जलस्तर राइन पर नौकायन के लिए सबसे अहम पैमाना माना जाता है, क्योंकि यहां नदी एक संकरे और पथरीले रास्ते से गुजरती है. अगर स्तर और गिरा तो बड़े मालवाहक जहाजों का गुजरना नामुमकिन हो जाएगा.

खजाने की तलाश और सफाई अभियान

नदी की सतह के जो हिस्से बरसों बाद पहली बार दिखाई दिए हैं, वे लोगों की उत्सुकता का केंद्र बन गए हैं. कई लोग वहां खजाने की तलाश में पहुंच रहे हैं, हालांकि ज्यादातर के हाथ सिर्फ कचरा ही लगता है. इसी मौके का फायदा उठाते हुए ‘राइनक्लीनअप’ पहल उन दुर्गम इलाकों की सफाई कर रही है, जहां सामान्य दिनों में पहुंचना मुश्किल होता है. बिंगेन के पास भी पानी घटने से एक पुराना पत्थर का तटबंध उभर आया है, जिस पर चलकर अब पर्यटक ‘मौसेटुर्म’ तक पैदल पहुंच सकते हैं.

फेरी बंद, सड़कों पर दबाव

जलस्तर घटने से कई फेरी सेवाएं भी ठप पड़ गई हैं, जो कारों और पैदल यात्रियों को नदी पार कराती थीं. इसका सीधा असर सड़कों पर दिख रहा है, जहां भीड़ और लंबा जाम आम बात हो गई है. बॉन में हालात खासतौर पर तनावपूर्ण हैं, जहां राइन के एक मुख्य पुल के टूटने और पुनर्निर्माण कार्य ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. जो लोग यह विकल्प चुन सकते हैं, वे फिलहाल घर से ही काम करना बेहतर समझ रहे हैं.

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