अंडरग्रेजुएट मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंट टेस्ट (NEET UG) देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों उम्मीदवार डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट एग्जाम में बैठते हैं।
नीट में क्वालीफाई होने के बाद देश के कुल 823 मेडिकल कॉलेजों में 1,36,939 एमबीबीएस सीटों के लिए टफ कॉम्पिटिशन होता है। नीट में टॉप स्को करने वाले स्टूडेंट्स के लिए एडमिशन पाना हो जाता है। लेकिन अगर भूल से भी एक गलती कर दी तो नीट में टॉप स्कोर के बाद भी 2 साल तक एडमिशन नहीं ले पाएंगे। आइए जानते हैं मेडिकल एडमिशन का नया नियम क्या है?
मेडिकल एडमिशन का नया नियम क्या है?
महाराष्ट्र सरकार ने उन उम्मीदवारों को दो साल के लिए बैन करने का फैसला किया है जो एडमिशन राउंड में हिस्सा लेते हैं, सीटें ब्लॉक करते हैं और फिर कहीं भी एडमिशन नहीं लेते। अगर नीट यूजी में अच्छा स्कोर लाने वाला कोई उम्मीदवार सीट ब्लॉक करता है और एडमिशन नहीं लेता है तो वह अगले दो साल तक डॉक्टर बनने के बारे में सोच भी नहीं सकता है।
गैजेट में कहा गया है, ‘जो चुने हुए उम्मीदवार एडमिशन प्रक्रिया के आखिरी राउंड में अपनी अलॉट की गई सीट पर रिपोर्ट नहीं करते या जॉइन नहीं करते, जिससे उनकी सीट खाली रह जाती है, वे अगले दो साल तक एडमिशन के लिए योग्य नहीं होंगे।’ भले ही उनका नीट स्कोर टॉप ही क्यों न हो, बैन लगने के बाद वह अगले दो साल तक कहीं एडमिशन नहीं ले पाएगा। राज्य सरकार ने मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट-बेस्ड बनाने के लिए 10 साल बाद नियमों में बदलाव किया है।
सीट ब्लॉकिंग में 2 साल बैन नियम की जरूरत क्यों पड़ी?
मेडिकल एडमिशन के दौरान अक्सर देखा गया है कि कुछ उम्मीदवार काउंसलिंग के आखिरी राउंड तक अपनी सीटें रोके ब्लॉक करके रखते थे और बाद में एडमिशन नहीं लेते थे। इससे वह सीट बेकार हो जाती थी और मेरिट लिस्ट में नीचे मौजूद योग्य उम्मीदवारों को नुकसान होता था।
विवादित ‘इंस्टीट्यूशनल कोटा राउंड’ भी खत्म
महाराष्ट्र के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में ‘इंस्टीट्यूशनल कोटा राउंड’ खत्म कर दिया है। इसके साथ ही विवादित ‘इंस्टीट्यूशनल कोटा राउंड’ खत्म करने वाला आखिरी राज्य बन गया है। इस फैसले से इन कॉलेजों में छात्रों के एडमिशन का तरीका बदल जाएगा। अब एडमिशन सिर्फ राज्य के CET सेल की सेंट्रलाइज्ड प्रक्रिया से होंगे। एडमिशन राउंड की संख्या पांच से बढ़कर छह हो सकती है। यह कदम महाराष्ट्र को उन दूसरे राज्यों की कतार में खड़ा करता है जिन्होंने ऐसे ही कदम उठाए हैं।महाराष्ट्र अकेला ऐसा राज्य था जिसने इस तरह की व्यवस्था बनाए रखी थी। दूसरे राज्यों में मेडिकल एडमिशन पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग के जरिए होते हैं। इस कदम से एडमिशन साइकल के आखिर में सीटें भरने के मामले में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के पास बहुत कम आजादी बचेगी और उम्मीद है कि इससे प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और मेरिट पर आधारित होगी। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि प्राइवेट कॉलेज इस गैजट को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
राज्य के गैजेट में कहा गया है कि मेडिकल और डेंटल अंडरग्रेजुएट कोर्स में सभी एडमिशन सक्षम अधिकारी द्वारा केवल ऑनलाइन सेंट्रलाइज्ड एडमिशन प्रोसेस (CAP) राउंड के जरिए किए जाएंगे, जिसमें ऑनलाइन ‘स्ट्रे वैकेंसी राउंड’ या उसके बाद के ‘स्ट्रे वैकेंसी राउंड’ भी शामिल हैं। जिन छात्रों ने 12वीं कक्षा में बायोलॉजी के बजाय फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोटेक्नोलॉजी को चुना था और एंट्रेंस टेस्ट पास किया है, वे भी एडमिशन राउंड में हिस्सा लेने के योग्य होंगे।
‘इंस्टीट्यूशनल कोटा राउंड’ क्यों खत्म हुआ?
‘इंस्टीट्यूशनल राउंड’ को लेकर मेडिकल एस्पिरेंट्स, टीचर्स और पेरेंट्स लंबे समय से आरोप लगा रहे थे कि इससे मनमानी फीस की मांग, आखिरी समय में सीट अलॉटमेंट और ऐसे एडमिशन होते हैं जो हमेशा पब्लिश मेरिट लिस्ट के हिसाब से नहीं होते। इस प्रोसेस में बार-बार कानूनी और रेगुलेटरी दिक्कतें भी आईं।2023 में, महाराष्ट्र ने एक ऑफलाइन इंस्टीट्यूशनल कोटा राउंड आयोजित किया, लेकिन इसके ज़रिए एडमिशन लेने वाले छात्रों को NMC ने मान्यता नहीं दी। अगले साल, राज्य ने शुरू में यह राउंड न कराने का फ़ैसला किया। हालाँकि, एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के कोर्ट जाने के बाद, एक ऑनलाइन इंस्टीट्यूशनल कोटा प्रोसेस आयोजित किया गया। अब तक, जब से मेडिकल एडमिशन शुरू हुए हैं, ऑनलाइन CAP राउंड के बाद बिना सीट वाले छात्र अलग-अलग प्राइवेट कॉलेजों द्वारा आयोजित इंस्टीट्यूशनल राउंड के लिए योग्य हो जाते थे।आरोप था कि कॉलेज मेरिट लिस्ट जारी करते थे, लेकिन फाइनल अलॉटमेंट अक्सर मेरिट के हिसाब से नहीं होते थे। वहीं कॉलेजों का दावा था कि जब ज्यादा रैंक वाले उम्मीदवार रिपोर्ट नहीं करते थे, तो सीटें कथित तौर पर कम रैंक वाले उन छात्रों को ऑफर की जाती थीं जो काफी ज्यादा पैसे देने को तैयार होते थे। अब यह बंद हो जाएगा।























































