मुजफ्फरनगर। बघरा कस्बे में मोहर्रम के अवसर पर आयोजित कदीमी जुलूस पूरी अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। यह जुलूस मरहूम हाजी युसूफ अली के आवास से बरामद हुआ, जिसमें हजरत अब्बास से मंसूब कदीमी अलम-ए-मुबारक भी शामिल रहा। जुलूस अपने पारंपरिक और रिवायती रास्तों से होता हुआ इमाम बारगाह आरिफ शाहियान पहुंचा, जहां फज्र के समय अलम की इब्तिदा और अन्य धार्मिक रस्में अदा की गईं। जुलूस के दौरान क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा तथा बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।
कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध नोहा ख्वां वसीम आरफी और अब्बास अली आरफी ने नोहा ख्वानी पेश कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। उनके दर्दभरे कलाम को सुनकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद इमामबाड़े में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए लखनऊ से आए मौलाना शरर नकवी ने हजरत अब्बास के फजाइल और मसाइब पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वफादारी का दूसरा नाम हजरत अब्बास है और हर इंसान को अपने रिश्तों में उसी तरह की निष्ठा और ईमानदारी का परिचय देना चाहिए, जैसा हजरत अब्बास ने इमाम हुसैन के साथ दिया था।
मौलाना ने अपने बयान में कहा कि इंसाफ और सच्चाई को जिंदा रखने के लिए हमेशा बड़ी फौजों और हथियारों की जरूरत नहीं होती, बल्कि सच्चे मकसद के लिए दी गई कुर्बानियां भी इतिहास में जीत का रास्ता तय करती हैं। उन्होंने कहा कि कर्बला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां इमाम हुसैन ने अत्याचार और अन्याय के सामने सिर झुकाने के बजाय अपनी और अपने साथियों की कुर्बानी देकर इंसानियत, न्याय और सत्य का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानियों का ही परिणाम है कि आज भी इस्लाम का नाम दुनिया भर में सम्मान के साथ लिया जाता है।
मौलाना शरर नकवी ने कहा कि कर्बला की दुखद घटना से सबसे बड़ी सीख यह मिलती है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन और उनके साथियों ने साबित कर दिया कि केवल सैन्य शक्ति ही ताकत नहीं होती, बल्कि सच्चाई, सब्र और ईमान भी सबसे बड़ी ताकत होते हैं। उन्होंने अपने बयान के दौरान मशहूर शेर पढ़ा, “इंसान को बेदार तो हो लेने दो, हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन।”
कार्यक्रम के सफल आयोजन में इमामबाड़ा कमेटी के पदाधिकारियों और वालंटियर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिशान अली ने बताया कि इस अवसर पर सरताज अली, आस मोहम्मद, शबी अब्बास, शान मोहम्मद, मास्टर अली रजा, काशिफ रजा, बिलाल हैदर, शाबिओ, कमर अब्बास, अकबर अब्बास, हाशिम, मुसर्रत हुसैन, डॉ. हसन मेहंदी, शमशुल हसन सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम का आयोजन शांतिपूर्ण और धार्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।
























































