झारखंड हाइकोर्ट ने शुक्रवार को सीजीएल परीक्षा (विज्ञापन संख्या 10/2023) और सीडीपीओ (विज्ञापन संख्या 21/2023) की नियुक्ति परीक्षा रद्द करने की 18 अगस्त की अधिसूचना पर रोक लगा दी.वहीं नियुक्त अधिकारियों को काम जारी रखने का निर्देश दिया, अदालत के इस आदेश से सीजीएल से नियुक्त 1975 अधिकारियों और 64 सीडीपीओ को अंतरिम राहत मिल गई है.झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शुक्रवार को अलग-अलग परीक्षाओं के विज्ञापन को रद्द करने की राज्य सरकार की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की. इसके बाद कोर्ट ने अगले आदेश तक अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी. वहीं अदालत ने राज्य सरकार को जांच की पूरी जानकारी से संबंधित शपथ पत्र सात सितंबर तक दायर करने का निर्देश दिया. मौके पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया कहा कि किसी नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन किए बिना खत्म नहीं किया जा सकता. सरकार के आदेश में ऐसी सामग्री नहीं दिखती है, जिससे इतनी बड़ी कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके.
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि भर्ती मामले की जांच सीआईडी पहले से कर रही है. अदालत ने कहा कि प्रार्थियों की सेवाएं बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के समाप्त की गई है. ऐसे में न्यायहित और सुविधा का संतुलन प्रार्थियों के पक्ष में है. अदालत ने यह भी कहा कि नोटिफिकेशन पर अमल जारी रहना जनहित के खिलाफ होगा. अदालत ने 18 अगस्त के नोटिफिकेशन के विज्ञापन संख्या 10/2023 से संबंधित हिस्से के क्रियान्वयन, संचालन और प्रभाव पर अगले आदेश तक रोक लगा दी. महाधिवक्ता को संबंधित विभाग को सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि प्रार्थियों के साथ-साथ इस आदेश से समान रूप से प्रभावित अन्य कर्मचारियों को भी काम जारी रखने दिया जाए.
सरकार को सात सितंबर तक जवाबी शपथ पत्र देने का आदेश
अदालत ने राज्य सरकार को सात सितंबर तक जवाबी शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसमें सीआईडी जांच और अब तक हुई आगे की कार्रवाई की जानकारी देनी होगी. प्रार्थियों को 14 सितंबर तक जवाबी शपथ पत्र दाखिल करना होगा. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर 12.15 बजे होगी.
ज्ञात हो प्रार्थी रमेश उरांव और अन्य की ओर से याचिका दायर कर सीजीएल परीक्षा-2023 तथा सुभाष मुर्मू द्वारा सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षा रद्द करने की सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी गई है. इससे पूर्व प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स, प्रेरणा झुनझुनवाला और अन्य अधिवक्ताओं ने कहा कि सरकार ने अधिसूचना के माध्यम से अचानक नियुक्ति विज्ञापन को रद्द कर दिया, जबकि इन नियुक्ति विज्ञापन के माध्यम से चयनित होने के बाद सरकार ने उनकी नियुक्ति की है. अचानक पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं. नियुक्तियां रद्द करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया.
राज्य सरकार ने भी रखा पक्ष
मौके पर राज्य सरकार की ओर से भी पक्ष रखा गया. इसमें राज्य के महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय, वरीय अपर महाधिवक्ता अच्युत केशव, जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल व प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा. इधर 11वीं से 13वीं के अधिकारियों की नियुक्ति परीक्षा रद्द करने पर फिर लगी रोक हाइकोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के चयनित व नियुक्त अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सुनवाई करते हुए सरकार की अधिसूचना पर रोक लगा दी. साथ ही प्रार्थियों को काम करते रहने का निर्देश दिया.























































