स्मार्ट मीटर पर बढ़ता विवाद: बिल बढ़ने के आरोपों से उपभोक्ताओं में नाराजगी तेज,

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब एक बड़े विवाद का कारण बनते जा रहे हैं। जहां एक ओर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड इन मीटरों को आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था का हिस्सा बता रहा है, वहीं दूसरी ओर कई जिलों से उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

मुजफ्फरनगर के निवासी दीपक जैन ने इस मुद्दे को उठाते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पहले उनके घर का बिजली बिल 700 से 800 रुपये के बीच आता था, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद वही बिल बढ़कर 2500 से 2700 रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे बिजली नहीं बल्कि जेब जल रही हो। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय कर्मचारी उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।दीपक जैन ने इस पूरे मामले को राजनीतिक मुद्दे से भी जोड़ा और चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आगामी 2027 के चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी विभागों में बढ़ते भ्रष्टाचार को भी जनता की नाराजगी के प्रमुख कारणों में शामिल किया।

दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड का दावा है कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए कई फायदे लेकर आए हैं। विभाग के अनुसार प्री-पेड मीटर पर 2 प्रतिशत तक की छूट मिलती है, गलत बिलिंग की समस्या खत्म होती है, पारदर्शिता बढ़ती है और उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की रियल टाइम जानकारी मिलती है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर असंतोष कम होता नजर नहीं आ रहा है।कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदेश में दो तस्वीरें सामने आ रही हैं एक तरफ सरकार और विभाग इसे तकनीकी सुधार बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर आम उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या स्मार्ट मीटर वास्तव में “स्मार्ट” हैं या फिर आम जनता पर एक अतिरिक्त बोझ बनते जा रहे हैं।

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