पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा प्रहार, 10 साल जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव.

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए हैं. इसे 27 जुलाई को लोकसभा में पेश किया जाएगा. नए विधेयक में परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए सजा बढ़ाई गई है. अब ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है. इसके साथ ही जुर्माने की सीमा भी बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक कर दी गई है. पहले जुर्माने की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये थी. परीक्षा घोटालों की जांच के लिए केंद्र सरकार जरूरत पड़ने पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बना सकेगी. पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या STF को ऐसे मामलों की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी, ताकि कार्रवाई में देरी न हो.जल्द न्याय दिलाने के लिए हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने का प्रावधान किया गया है. इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी. चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोशिश होगी कि मुकदमे का फैसला 3 महीने के अंदर हो जाए. कानून लागू होने के बाद पहले से लंबित मामलों को भी इन फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा जा सकेगा. विधेयक में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का अधिकार भी दिया गया है. वहीं, फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट की दो जजों वाली बेंच में अपील की जा सकेगी और उस पर भी 3 महीने के भीतर फैसला देने का प्रयास किया जाएगा.

दोषी अधिकारियों पर 5 साल जेल और जुर्माना

परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और सर्विस प्रोवाइडर्स पर भी सरकार ने सख्ती बढ़ाई है. अगर कोई सर्विस प्रोवाइडर परीक्षा में पेपर लीक या किसी तरह की गड़बड़ी में शामिल पाया जाता है, तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. पहले यह सीमा 1 करोड़ रुपये थी. इसके अलावा ऐसी एजेंसियों को सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से रोकने की अवधि भी बढ़ाई गई है. अब उन्हें 4 साल की जगह 8 साल तक प्रतिबंधित किया जा सकता है.विधेयक में कंपनियों के निदेशक और सीनियर अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है. अगर किसी कंपनी के अधिकारी परीक्षा घोटाले में दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें कम से कम 5 साल की जेल और 5 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

संगठित गिरोहों पर लगेगा 10 करोड़ जुर्माना

संगठित तरीके से परीक्षा में धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी. ऐसे मामलों में न्यूनतम सजा को 5 साल से बढ़ाकर 7 साल किया गया है. वहीं, न्यूनतम जुर्माने की राशि भी 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है. सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में NEET-UG, UGC-NET और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. सरकार का लक्ष्य परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित बनाना, दोषियों को जल्द सजा दिलाना और लाखों छात्रों के भविष्य की रक्षा करना है.

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