मुजफ्फरनगर। तापमान और आद्रता बढ़ने के साथ खरीफ फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया ने किसानों से आवश्यकतानुसार ही अनुशंसित दवाओं का प्रयोग करने की अपील की।
धान में झुलसा, शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट रोग की निगरानी करने तथा कृषि विभाग की संस्तुति के अनुसार हेक्साकोनाजोल व ट्राइफ्लोक्सीस्ट्रोबिन आधारित दवाओं का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। तना छेदक और लीफ फोल्डर की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 4-5 फेरोमोन ट्रैप लगाने तथा प्रकोप बढ़ने पर अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करने को कहा गया है। फुदका कीट के नियंत्रण के लिए भी अनुशंसित दवाओं के प्रयोग की सलाह दी गई है।बासमती धान की गुणवत्ता और निर्यात मानकों को ध्यान में रखते हुए मुजफ्फरनगर समेत प्रदेश के 30 प्रमुख बासमती उत्पादक जिलों में 11 कीटनाशकों के प्रयोग पर प्रतिबंध है। इनमें ट्राइसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपायरीफॉस, टेबुकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथोक्साम, प्रोफेनोफॉस, इमिडाक्लोप्रिड, कार्बेन्डाजिम और कार्बोफ्यूरान शामिल हैं।
गन्ने में टॉप बोरर, शूट/स्टेम बोरर, पाइरिला और सफेद मक्खी की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। किसानों से जैविक नियंत्रण और स्वीकृत सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता देने तथा कीटों का प्रकोप बढ़ने पर कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों से संपर्क करने को कहा गया है।























































