उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को एक बहुत बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice – DoJ) ने सोमवार को दोनों के खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक आरोपों को हमेशा के लिए वापस ले लिया है।इसके साथ ही न्यूयॉर्क की अदालत में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड का मामला पूरी तरह से बंद हो गया है। अमेरिकी अभियोजकों ने निष्कर्ष निकाला कि वे इन आरोपों को साबित करने की स्थिति में नहीं हैं।यह फैसला तब आया है जब अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) ने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ 27.5 करोड़ डॉलर (करीब 2648 करोड़ रुपये) का भुगतान करके एक अलग मामला सुलझाया है। उस जांच में यह पता लगाया जा रहा था कि क्या कंपनी ने ईरान के खिलाफ वाशिंगटन के प्रतिबंधों का उल्लंघन किया था। न्यायालय के समक्ष दायर अपनी अर्जी में, अमेरिकी न्याय विभाग ने अडानी के खिलाफ अभियोग को विथ प्रिज्युडिस (With Prejudice) यानी हमेशा के लिए खारिज करने का अनुरोध किया।
क्या कहा कोर्ट ने?
DoJ ने अपने फाइलिंग में कहा कि न्याय विभाग ने इस मामले की समीक्षा की है और अपने अभियोगात्मक विवेक का उपयोग करते हुए, व्यक्तिगत प्रतिवादियों के खिलाफ इन आपराधिक आरोपों पर आगे और संसाधन न लगाने का फैसला किया है। इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि अडानी और अन्य के खिलाफ लगाए गए आरोपों को हमेशा के लिए खारिज किया जाता है।
क्या था पूरा मामला?
साल 2024 के अंत में अमेरिकी नियामक एसईसी (SEC) और न्याय विभाग (DoJ) द्वारा दर्ज मामलों में आरोप लगाया गया था कि अडानी ग्रुप ने भारत में सौर ऊर्जा के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को लगभग 26.5 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की योजना बनाई थी। साथ ही, अमेरिकी निवेशकों और ऋणदाताओं से पूंजी जुटाते समय इस व्यवस्था को छुपाया।
सोमवार को कोर्ट द्वारा केस को विथ प्रिज्युडिस खारिज किए जाने का मतलब यह है कि इस केस को अब भविष्य में दोबारा कभी नहीं खोला जा सकेगा। अमेरिकी आपराधिक कार्यवाही में इस तरह से केस खारिज होना काफी दुर्लभ है।
मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से पीटीआई ने बताया कि अमेरिकी अभियोजकों को इस मामले में कोई स्पष्ट अमेरिकी लिंक और आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। यह बहुप्रतीक्षित फैसला अमेरिकी अभियोजकों और अडानी समूह द्वारा तैयार की गई एक बेहद मजबूत कानूनी टीम के बीच महीनों की आक्रामक कानूनी पैरवी के बाद आया है।
ट्रंप के निजी वकील ने संभाली थी कमान
15 मई को रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सामने आया था कि इन आपराधिक आरोपों के हटने की जमीन पिछले महीने ही तैयार हो गई थी। तब अडानी के वकील रॉबर्ट गिफ्रा ने न्याय विभाग के अधिकारियों को एक प्रेजेंटेशन में बताया था कि जब तक यह मामला चलता रहेगा, अडानी एंटरप्राइजेज अमेरिका में अपना निवेश नहीं कर पाएगी। गौतम अडानी ने 2024 के अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद सार्वजनिक रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 10 अरब डॉलर का निवेश करने और 15,000 नौकरियां पैदा करने का वादा किया था।
गिफ्रा, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील भी हैं, ने अपने 100 पन्नों के प्रेजेंटेशन में मुख्य रूप से यह तर्क दिया कि यह मामला काफी कमजोर है क्योंकि यह अमेरिकी क्षेत्राधिकार में नहीं आता और इसमें सबूतों की भारी कमी है।























































