मुजफ्फरनगर। महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन चुनिंदा कैंसरों में शामिल है जिनकी काफी हद तक रोकथाम संभव है। जागरूकता की कमी, नियमित स्वास्थ्य जांच न कराना और बीमारी का देर से पता चलना इसके बढ़ते मामलों के प्रमुख कारण हैं। चिकित्सकों का मानना है कि एचपीवी टीकाकरण, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर उपचार के माध्यम से इस बीमारी को शुरुआती चरण में पहचानकर प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली की सीनियर डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (गायनेकोलॉजी) डॉ. स्वस्ति के अनुसार सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स की कोशिकाओं में विकसित होता है और धीरे-धीरे बढ़ता है। इसकी शुरुआत अक्सर ऐसी पूर्व-कैंसरकारी कोशिकीय परिवर्तनों से होती है जिनमें शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। यदि समय रहते इन असामान्य कोशिकाओं की पहचान और उपचार न किया जाए तो वे आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के उच्च जोखिम वाले प्रकारों से होने वाला लंबे समय तक बना रहने वाला संक्रमण है। यह वायरस मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। अधिकांश मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इस संक्रमण को समाप्त कर देती है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह संक्रमण लंबे समय तक बना रहने पर कैंसर का कारण बन सकता है।
डॉ. स्वस्ति ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर पैदा करने वाले प्रमुख वायरस प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करती है। किशोरावस्था में यह टीका लगवाना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है, हालांकि युवा महिलाओं को भी इससे फायदा मिल सकता है। इसके साथ ही पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट जैसी जांचें गर्भाशय ग्रीवा में होने वाले असामान्य बदलावों की शुरुआती पहचान में मदद करती हैं।
उन्होंने बताया कि शुरुआती अवस्था में सर्वाइकल कैंसर के लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन बीमारी बढ़ने पर असामान्य रक्तस्राव, दुर्गंधयुक्त योनि स्राव, पेल्विक क्षेत्र में दर्द, यौन संबंध के दौरान दर्द, लगातार थकान और बिना कारण वजन कम होना जैसे संकेत सामने आ सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, जागरूकता और टीकाकरण के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है और महिलाओं को स्वस्थ जीवन प्रदान किया जा सकता है।























































