7 साल बाद भारत आए शी जिनपिंग, दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर स्वागत.

नई दिल्ली में आज शनिवार से BRICS शिखर सम्मेलन 2026 शुरू हो रहा है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत दुनियाभर के कई नेता राजधानी कल ही दिल्ली पहुंच गए थे. जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज दोपहर करीब 12 बजे दिल्ली पहुंचे. दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद उनका जोरदार स्वागत किया गया. एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने जिनपिंग का स्वागत किया.दिल्ली दौरे के दौरान ब्रिक्स समिट के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच आज शाम द्वीपक्षीय मुलाकात भी होनी है, जिस पर दुनियाभर की नजर है. दोनों देशों के बीच जारी तल्खी के बीच ये बैठक काफी अहम मानी जा रही है.

इस दौरे के बीच चीन ने भारत के साथ संबंधों को नए सिरे से स्थापित करने के संकेत दिए हैं साथ ही मतभेदों को सही तरीके से सुलझाने की बात कही है. चीन के राजदूत ने कहा कि बीजिंग भारत के साथ मिलकर काम करेगा और पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के मार्गदर्शन में दोनों देशों के बीच मतभेदों को सुलझाएगा. दोनों देशों के बीच जारी तनाव के बीच जिनपिंग का भारत दौरा बेहद खास है.

भारत-चीन संबंधों की नई शुरुआत

शी जिनपिंग के शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने से कुछ घंटे पहले चीन के राजदूत जू फीहोंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने मतभेदों को सुलझाने और आपसी सहयोग के बारे में बात की. इस शिखर सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे.राजदूत ने अपनी पोस्ट में कहा ‘चीन और भारत राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की व्यवस्था कर रहे हैं. काज़ान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद, यह लगातार तीसरा वर्ष होगा जब दोनों नेता एक-दूसरे से मिलेंगे’. जू फीहोंग ने चीन और भारत के बीच संबंधों में एक नए सिरे से शुरुआत का संकेत भी दिया. उन्होंने कहा कि बीजिंग आपसी सहयोग और मतभेदों के समाधान सहित कई मोर्चों पर नई दिल्ली के साथ काम करेगा.

‘भारत के साथ मिलकर काम करेगा’

उन्होंने आगे कहा ‘चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन पर अमल करने, द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक स्तर पर और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से संभालने, संचार को बढ़ावा देने, सहयोग बढ़ाने, मतभेदों को उचित ढंग से सुलझाने और अच्छे पड़ोसी संबंधों का आनंद लेने वाले मित्र और एक-दूसरे की सफलता में मदद करने वाले साझेदार बनने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा’.

सात साल बाद भारत दौरे पर जिनपिंग

प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर शी जिनपिंग करीब सात सालों में पहली बार भारत की यात्रा कर रहे हैं. वो नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने आ रहे हैं. शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात होने की उम्मीद है. वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों को मजबूत करने और लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

आखिरी बार अक्टूबर 2019 में आए थे भारत

शी जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत का दौरा किया था, जब वो दूसरे भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए तमिलनाडु के मामल्लापुरम गए थे. यह बैठक भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध से ठीक छह महीने पहले हुई थी, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था.

2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प

2020 में पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ा और जून 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी. जिसमें भारत के 20 सैनिकों की मौत हुई थी. वहीं चीन ने भी अपने सैनिकों के हताहत होने की बात स्वीकार की, हालांकि उसकी संख्या भारत की तुलना में कम थी. इस घटना के बाद दोनों रिश्तों के बीच तल्खी बढ़ गई थी. भारत ने चीनी निवेश और ऐप्स पर सख्ती की, चीन से जुड़े कारोबार पर सुरक्षा जांच बढ़ी और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई. इस वजह से शी का भारत आना बेहद खास है.

शी-मोदी वार्ता का एजेंडा

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली यह बैठक दोनों नेताओं को संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति का आकलन करने और सीमा मुद्दे पर अगले कदमों पर चर्चा करने का अवसर देगी. हालांकि दोनों पक्षों ने हाल के वर्षों में संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं, फिर भी कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं. आज मोदी और शी के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

भारत को भारतीय व्यापारियों पर चीन द्वारा लगाए गए वीजा प्रतिबंधों और प्रमुख प्रौद्योगिकियों और उपकरणों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर चिंता है. वहीं, बीजिंग का कहना है कि सीमा मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक विकास से अलग रखा जाना चाहिए. भारत ने बार-बार यह बात दोहराई है कि सीमा की स्थिति ही संबंधों की समग्र दिशा तय करेगी.शी जिनपिंग का यह दौरा अरुणाचल प्रदेश के तकसिंग में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच नए सिरे से तनाव की खबरों के बीच हो रहा है. नई दिल्ली के लिए चिंता का एक और मुद्दा तिब्बती पठार पर ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से पर चीन द्वारा प्रस्तावित 137 अरब डॉलर का विशाल बांध है. नेपाल में हाल ही में हुए ग्लेशियर के ढहने के बाद बढ़ती चिंताओं के मद्देनजर भारत ने इस परियोजना पर अधिक पारदर्शिता और सूचना साझाकरण की मांग की है.

 

लाइव विडियो
विज्ञापन
क्रिकेट स्कोर
राशिफल
DELHI Weather
Recent Posts