स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खुल गए 3 रास्ते, किस रास्ते से गुजर रहे जहाज?

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अब जहाजों के लिए एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग रास्ते इस्तेमाल हो रहे हैं. ईरान ने अपने क्षेत्रीय जल में नया ट्रैफिक रूट तय किया है, जबकि ओमान और इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (आईएमओ) ने एक वैकल्पिक दक्षिणी रास्ता प्रस्तावित किया है. इसके अलावा कई जहाज अब भी पुराने प्री-वार रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे ईरान ने खतरे वाला क्षेत्र घोषित किया है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर होर्मुज में तीन रास्तों की जरूरत क्यों पड़ी, कौन सा रास्ता सबसे सुरक्षित है और इसका वैश्विक तेल व्यापार पर क्या असर पड़ सकता है. इस स्पेशल स्टोरी में समझिए होर्मुज के तीनों समुद्री रूट का पूरा गणित.

आखिर होर्मुज में तीन समुद्री रास्ते क्यों बन गए?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया भर में पहुंचती है. हाल के सुरक्षा तनाव के बाद ईरान ने जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए अपने क्षेत्रीय जल से होकर गुजरने वाला नया ट्रैफिक रूट तय किया है. दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (आईएमओ) और ओमान ने जहाजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दक्षिण की ओर एक वैकल्पिक रास्ता प्रस्तावित किया है. इसके बावजूद कई जहाज अब भी पुराने केंद्रीय प्री-वार रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी फिलहाल होर्मुज में तीन अलग-अलग समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही हो रही है.

तीनों रास्तों में क्या है अंतर और कौन किसका समर्थन कर रहा है?

पहला रास्ता ईरान का तय किया हुआ ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम है, जिसे 19 जून 2026 से लागू करने की मांग की गई. यह पूरी तरह ईरान के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरता है. दूसरा रास्ता ओमान और आईएमओ का प्रस्तावित दक्षिणी रूट है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है, लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया है. तीसरा पुराना प्री-वार रूट है, जिसका इस्तेमाल पहले से होता रहा है. हालांकि ईरान ने इसे अप्रैल 2026 में ‘डेंजर जोन’ घोषित कर दिया था. इसके बावजूद कुछ जहाज अभी भी इसी रास्ते से गुजर रहे हैं.

होर्मुज इतना संवेदनशील क्यों है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अपने सबसे संकरे हिस्से में केवल 24 मील चौड़ा है. यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और दोनों देशों के एक्सक्लूसिव इकोनोमिक जोन (ईईजेड) बीच में मिलते हैं. रास्ता बेहद संकरा होने की वजह से बड़े जहाजों के पास दिशा बदलने या खतरे से बचने के लिए बहुत कम जगह होती है. इसी कारण किसी भी सुरक्षा खतरे की स्थिति में जहाजों के लिए तुरंत प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि इस समुद्री मार्ग को दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जलमार्गों में गिना जाता है.

अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है और अभी क्या है स्थिति?

संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून यूएनसीएलओएस के अनुसार सभी देशों के जहाजों को किसी दूसरे देश के क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र से ‘इनोसेंट पैसेज’ यानी शांतिपूर्ण आवाजाही का अधिकार है. साथ ही तटीय देश बिना उचित कारण विदेशी जहाजों की सामान्य आवाजाही में बाधा नहीं डाल सकता. हालांकि अगर किसी जहाज की गतिविधि सुरक्षा के लिए खतरा मानी जाती है, तो संबंधित देश आवश्यक कदम उठा सकता है. वहीं यूके मेरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) के अनुसार हाल के दिनों में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. इसलिए जहाजों को अब भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है.

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