अब होगी भारत की शर्तों पर ट्रेड डील, डोनाल्ड ट्रंप के यू टर्न से खुला नया रास्ता,

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट दी है। इससे भारत और चीन जैसे देशों पर 100 प्रतिशत का भारी-भरकम आयात शुल्क लगने से बच गया है।

भारत अपनी शर्तों पर अमेरिका राजी कर सकेगा

टैरिफ हटाने के फैसले से यह भी उम्मीद बढ़ी है कि भारत अपनी शर्तों पर अमेरिका राजी कर सकेगा। हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत-अमेरिका बीटीए की पहली खेप (फर्स्ट ट्रांच) को अंतिम रूप दिया जा चुका है और वर्तमान में उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है। यह समझौता तब लागू किया जाएगा, जब भारत को समान प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ सुनिश्चित हो जाएगा।

द्विपक्षीय व्यापार समझौते में भारत की प्रमुख शर्तें

असल में अमेरिका और भारत के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते में भारत की प्रमुख शर्तें और रणनीतिक मांगें मुख्य रूप से अपने घरेलू उद्योगों, कृषि क्षेत्र और वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा की सुरक्षा से जुड़ी हैं। आइए जानते हैं…भारत की शर्तें क्या हैं…

  • संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा पर भारत ने अमेरिका को स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने कृषि और डेयरी क्षेत्र को पूरी तरह से अमेरिकी उत्पादों के लिए नहीं खोलेगा।
  • जेनेटिकल मॉडिफाइड फसलों, अमेरिकी पोल्ट्री, डेयरी, गेहूं, चावल, चीनी और सोयाबीन पर भारत शुल्क दरों में कोई रियायत नहीं देगा, ताकि भारतीय किसानों का नुकसान न हो।
  • भारत की प्राथमिक शर्त यह है कि उसके उत्पादों मसलन कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, हस्तशिल्प और ऑटो पार्ट्स को अमेरिकी बाजार में वियतनाम, बांग्लादेश या पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम या बराबर शुल्क दरों पर पहुंच मिले।
  • भारत अमेरिका से आयात-निर्यात शुल्क में बार-बार बदलाव के बजाय दीर्घकालिक और अनुमानित शुल्क ढांचे की गारंटी चाहता है।
  • भारतीय निर्यात जैसे- झींगा, फल, मसाले और फार्मा उत्पाद को अमेरिकी गुणवत्ता नियमों के आधार पर रोकने या खारिज करने के कड़े गैर-टैरिफ अवरोधों को समाप्त या सरल किया जाए।
  • भारत के फार्मास्युटिकल निर्यातकों के लिए US FDA की प्रक्रियाओं को आसान और पारदर्शी बनाने की मांग।
  • भारत अमेरिका से सेमीकंडक्टर, एआई (AI) और उच्च तकनीक वाले उत्पादों के हस्तांतरण और असैन्य परमाणु ऊर्जा/डेटा सेंटर क्षेत्रों में दीर्घकालिक अमेरिकी निवेश चाहता है।
  • रियायती दर पर ऊर्जा आयात और अमेरिकी तेल/गैस (LNG) सप्लाई चैन में बेहतर कनेक्टिविटी की मांग।
  • भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया है कि समझौता तभी लागू किया जाएगा जब भारत को अमेरिकी बाजार में अपने प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले स्पष्ट लाभ और संरक्षण प्राप्त हो जाएगा।
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