अतर्रा (बांदा)। संतान का पहला कर्तव्य अपने बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करना है, क्योंकि वृद्धों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। यह बातें वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी साकेत बिहारी मिश्र ने रक्षाबंधन के अवसर पर रघुनाथ भवन, रामलीला मैदान में वृद्ध सेवा संस्थान के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में बुजुर्गों को सम्मानित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि यदि बुजुर्ग हमारी सेवा से प्रसन्न होकर आशीर्वाद दें, तो यह दुनिया की सबसे बड़ी निधि है। कार्यक्रम में कर्वी से आए हरिशरण गुप्त मुख्य अतिथि और कालिका प्रसाद शिवहरे, शिवदत्त गर्ग, कविंद्र त्रिवेदी समेत कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर दो दर्जन से अधिक निराश्रित बुजुर्ग महिला-पुरुषों को गद्दा, फूलमाला, भोजन प्रसाद देकर सम्मानित किया गया। संस्थान के अध्यक्ष पंडित ओमप्रकाश मिश्रा ने अतिथियों को खेरापति गौराबाबा की प्रतिमा भेंट की और वृद्ध सेवा भवन निर्माण में सहयोग का आग्रह किया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक गिरजाशरण तिवारी ने किया।















