MSME उद्यमियों ने रखी 10 सूत्रीय मांगें, पर्यावरण संरक्षण के साथ उद्योगों की व्यावहारिक कठिनाइयों पर ध्यान देने की अपील

मुज़फ्फरनगर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) ने MSME उद्यमियों की समस्याओं और सुझावों को सामने रखते हुए सरकार संबंधित विभागों से व्यावहारिक समाधान की मांग की है। संस्था का कहना है कि MSME सेक्टर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और लाखों लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है। ऐसे में उद्योगों की मजबूरियों को समझते हुए नियमों को लागू किया जाना चाहिए ताकि उद्योग और पर्यावरण दोनों का संतुलन बना रहे।IIA के अनुसार, सबसे पहली आवश्यकता उद्योगों पर सीधे जुर्माना या बंदी की कार्रवाई करने से पहले चेतावनी व्यवस्था लागू करने की है। यदि किसी इकाई में खामियां पाई जाती हैं, तो उन्हें सुधार का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही NOC संशोधन की प्रक्रिया को सरल और उद्यमी हितैषी बनाए जाने की जरूरत है। कई इकाइयाँ पहले ही पूरी फीस जमा करती हैं, ऐसे में संशोधन के लिए नई फीस लगाने के बजाय उसी फीस के अंतर्गत संशोधन किया जाए।उद्यमियों ने NOC शुल्क की गणना पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जिन उद्योगों की एक से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ हैं, उनके लिए शुल्क की गणना केवल उस इकाई के पूंजी निवेश पर होनी चाहिए, जिसके लिए आवेदन किया जा रहा है, कि पूरी कंपनी के अचल निवेश पर। वहीं प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सहमति शुल्क में छूट का सुझाव दिया गया है। यदि कोई उद्योग प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करता है तो उसकी राशि को सहमति शुल्क की गणना में समायोजित किया जाना चाहिए।उद्यमियों की एक और बड़ी समस्या EPR और NOC फॉर्म भरने में आती है। अक्सर तकनीकी कारणों से यह प्रक्रिया जटिल हो जाती है, जिस कारण उद्यमी बिचौलियों पर निर्भर हो जाते हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए IIA ने सुझाव दिया है कि एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जो उद्यमियों को फॉर्म भरने में सीधी मदद कर सके। इसके साथ ही श्वेत श्रेणी (White Category) की इकाइयों को औपचारिक प्रमाणपत्र जारी करने की भी मांग की गई है ताकि निरीक्षण के दौरान उन्हें बिना NOC संचालित इकाई माना जाए।IIA ने यह भी कहा कि जिन माइक्रो और स्मॉल यूनिट्स ने जिला उद्योग केंद्र से NOC प्राप्त की है, उन्हें Pollution Control Board से अलग से NOC लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। वहीं MSME इकाइयों को मुख्यधारा में लाने के लिएसमाधान/माफी योजनाविवाद से विश्वासके आधार पर विशेष कैंप आयोजित करने की भी अपील की गई है। इस कैंप में हवा और पानी की Consent के आवेदन उसी समय भरवाकर Consent Certificate जारी किए जाएं।DG सेट को लेकर भी उद्यमियों ने सुझाव दिया है। उनका कहना है कि यदि किसी इकाई ने पुराने DG सेट की Consent ली थी और बाद में नया DG सेट खरीद लिया है तो वही Consent नए DG सेट के लिए मान्य मानी जाए। हाल ही में कुछ इकाइयों पर पुराने DG सेट को लेकर भारी जुर्माना लगाया गया है, जबकि उन्होंने नए DG सेट खरीद लिए हैं। ऐसे मामलों में उद्यमियों के ऊपर लगाए गए जुर्माने माफ किए जाने चाहिए।इसके अलावा IIA ने यह भी सुझाव रखा है कि सहमति से जो राजस्व किसी शहर या जनपद से एकत्र होता है, उसका उपयोग स्थानीय स्तर पर पर्यावरण सुधार और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना में होना चाहिए। इससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और पर्यावरणीय सुधार भी सुनिश्चित होगा।MSME उद्यमियों ने साफ किया है कि वे पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपने उद्योगों का संचालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका मानना है कि सरकार और विभागों के सहयोग से ही उद्योग और पर्यावरण दोनों को साथ लेकर प्रदेश की प्रगति में योगदान संभव हो पाएगा।

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