मुज़फ्फरनगर। उत्तर प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी ‘मिशन शक्ति 5.0’ अभियान के तहत महिला कल्याण विभाग, जनपद मुज़फ्फरनगर और बाल कल्याण समिति (CWC) के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘बाल विवाह को ना – चैंपियन्स का सम्मान’ रहा, जिसका उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध जागरूकता फैलाना और उन बालिकाओं को सम्मानित करना था जिन्होंने समाज में साहस और जागरूकता की मिसाल पेश की।
इस अवसर पर उन बहादुर बालिकाओं को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने अथवा किसी अन्य बाल विवाह को रोककर समाज के सामने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि बाल विवाह रोकने के प्रयास में उन्हें पारिवारिक व सामाजिक दबाव, मानसिक चुनौतियों और विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने हौसले से इन सभी बाधाओं को पार किया। इन बालिकाओं को अधिकारियों ने समाज की सच्ची प्रेरणा और ‘रोल मॉडल’ बताया।
समारोह में बाल विवाह के दुष्परिणामों, इसके सामाजिक व कानूनी पहलुओं, तथा इसे जड़ से समाप्त करने की रणनीतियों पर गहन चर्चा हुई। उपस्थित विशेषज्ञों ने बताया कि बाल विवाह न केवल बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, बल्कि यह उनके भविष्य के विकास में भी बड़ी बाधा बनता है। जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इस अवसर पर हैशटैग #EndingChildMarriage का प्रयोग किया गया, जिससे समाज में बाल विवाह के खिलाफ जनआंदोलन का संदेश फैलाया जा सके।
कार्यक्रम में ज़िले के प्रमुख अधिकारियों ने हिस्सा लिया और बालिकाओं को सम्मानित किया। बाल कल्याण समिति से अध्यक्ष रीना पवार, सदस्य पिंकी रानी और संदीप उपस्थित रहे। जिला बाल संरक्षण इकाई की संरक्षण अधिकारी नीना त्यागी, चाइल्ड लाइन के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर सचिन और राज्य की विशेष दत्तक ग्रहण इकाई (SAA) की प्रतिनिधि रितु चौधरी ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
महिला कल्याण विभाग ने ज़िले के नागरिकों से अपील की कि वे बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए प्रशासन का सहयोग करें और अपने आसपास ऐसे मामलों की जानकारी तुरंत अधिकारियों को दें। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि मुज़फ्फरनगर को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए हर नागरिक अपनी भूमिका निभाएगा।















