अलवर जिले के थानागाजी विधानसभा क्षेत्र के गांव गूढ़ा मंडी में किसानों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा। खेतों में मेहनत से तैयार किया गया हरा धनिया जब मंडी पहुंचा तो उम्मीद थी कि अच्छी कीमत मिलेगी, लेकिन बाजार की हालत कुछ और ही बयां कर रही थी। मंडी में धनिया की अत्यधिक आवक और मांग की कमी के चलते किसानों को अपना उत्पाद मात्र दो रुपए प्रति किलो में बेचने को मजबूर होना पड़ा। कई किसानों को यह रेट इतना नुकसानदेह लगा कि वे अपना धनिया वहीं पटक कर मंडी से खाली हाथ लौट गए। कुछ किसान अपने बर्तन और टोकरी तक मंडी में ही छोड़कर चले गए।
स्थानीय सामाजिक संगठन एलपीएस विकास संस्थान से जुड़े प्रकृति प्रेमी रामभरोस मीणा ने बताया कि इस बार क्षेत्र में हरे धनिए की बंपर पैदावार हुई है, लेकिन मंडियों में खरीद व्यवस्था बेहद असंतुलित है। आढ़ती अपने लाभ और जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करते हैं, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। खेतों में मजदूरी कराए जाने के बाद भी लागत वसूल नहीं हो रही है।
मंडी में पहुंचने वाले अधिकांश किसानों को दो से आठ रुपए प्रति किलो की दर पर धनिया बेचना पड़ा, जिससे उनकी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर गया। कुछ किसानों ने तो मंडी में ही अपने धनिए की पोटलियां फाड़ दीं और नाराज होकर लौट गए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कृषि विपणन व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है और साफ कर दिया है कि अगर तुरंत समाधान नहीं निकाला गया, तो किसानों की आर्थिक स्थिति और भी दयनीय हो सकती है।















