बांदा। बरसात खत्म होते ही जनपद में अवैध खनन का काला कारोबार फिर अपने पैर पसारने लगा है। तिंदवारी थाना क्षेत्र की चर्चित बेंदा खदान एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां NGT के निर्देशों और प्रशासन के आदेशों को खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। नदी की जलधारा में मशीनों से अवैध खनन और ओवरलोड वाहनों का खेल फिर शुरू हो गया है। खदान की कवरेज करने गई टीम के कैमरों में जो तस्वीरें कैद हुईं, वो बेहद चौंकाने वाली हैं। साफ देखा जा सकता है कि खदान संचालक को प्रशासन के किसी भी आदेश का जरा भी खौफ नहीं है। दिनदहाड़े पोकलेन मशीनों से नदी की छाती चीरी जा रही है और ओवरलोड ट्रकों में बालू भरकर भेजा जा रहा है।लगातार हो रहा अवैध खनन बांदा वासियों के लिए अभिशाप बन चुका है। इससे न सिर्फ नदी की जलधारा प्रभावित हो रही है, बल्कि जनपद के तापमान और पर्यावरण संतुलन पर भी बुरा असर पड़ रहा है। गर्मी के दिनों में बांदा का तापमान पूरे विश्व में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जिसके लिए पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों ने अवैध खनन को ही मुख्य कारण माना था। बरसात खत्म होते ही खनन माफियाओं के हौसले फिर बुलंद हैं। बेंदा खदान शुरू होते ही संचालक और उसके गुर्गों ने अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया है। एक तरफ मशीनों की गड़गड़ाहट से पूरा इलाका कांप रहा है, तो दूसरी तरफ ओवरलोड बालू लदे ट्रकों से स्थानीय सड़कें कराह रही हैं। सूत्रों की मानें तो खदान से जुड़े लोग खुलेआम कहते घूम रहे हैं “हमारा खेल पूरी तरह सेट है, हमारी खदान में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की नजर नहीं पड़ेगी, सबको सेट कर रखा है। अब बड़ा सवाल यह है कि बेंदा खदान में चल रहे इस अवैध खनन और ओवरलोडिंग के गोरखधंधे पर आखिर कब लगाम लगेगी? क्या प्रशासन सिर्फ कागजों में ही कार्रवाई करेगा या फिर यह खदान यूं ही पहलवानी दांवपेंच का अखाड़ा बनी रहेगी?














