बांग्लादेश के दो नागरिकों को फांसी दिए जाने को लेकर उठे आक्रोश के बीच सऊदी अरब में मौत की सजा का एक और मामला सामने आया है। सऊदी अरब में एक युवक को मौत की सजा दी है, जो कथित तौर पर उसने तब किए थे जब वह 14 साल का एक नाबालिग किशोर था।दुनिया भर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर नजर रखने वाली संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने इसकी जानकारी दी है। HRW ने बताया कि सऊदी अधिकारियों ने इसी 17 अक्टूबर को हसन जकी अल-फराज को मौत पर अमल किया।
किशोरावस्था में किए गए अपराधों पर फांसी
ह्यूमन राइट वॉच ने इस मामले को बेहद क्रूर मौत बताया है, जो दिखाता है कि सऊदी अरब में बचपन में किए गए अपराधों के लिए भी मौत की सजा मिलने का खतरा है। रिपोर्ट में कहा गया कि सऊदी सुप्रीम कोर्ट ने यूसुफ अल-मनासिफ नाम के एक और व्यक्ति की मौत की सजा को भी बरकरार रखा है। उसे उन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है, जो उसने 15-16 साल की उम्र में किए थे। अब उस पर भी मौत की सजा का खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही कम से कम 3 और लोग भी मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं, जिन्हें बचपन में किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है।
जबरन कराया गया अपराध कबूल
ह्यूमन राइट वॉच सऊदी अरब से जुड़े मामलों की सीनियर रिसर्चर जोई शिया ने हसन अल-फराज की मौत की सजा को पूरी तरह से गलत बताया है। उन्होंने खास तौर पर कहा कि इस मामले में यातना के जरिए हसन के खिलाफ सबूत जुटाए गए और उसे निष्पक्ष सुनवाई का भी मौका नहीं दिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यूसुफ अल-मनासिफ पर भी मौत की सजा दिए जाने का खतरा मंडरा रहा है।यूरोपियन सऊदी ऑर्गनाइजेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स (ESOHR) के अनुसार, सऊदी अरब के स्पेशलाइज्ड क्रिमिनल कोर्ट ने अल-मनासिफ और अल-फराज के अलावा अली-मब्यूक, जवाद कुरैसिस, अली अल-सुबैती और मही अल-मोहसिन को मौत की सजा सुनाई दी थी। इन सभी पर किशोरावस्था में कथित तौर पर आतंकवाद से जड़े अपराध का आरोप लगाया गया।
शियाओं पर अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन में था शामिल
ह्यूमन राइट वॉच ने बताया कि अल-फराज को 27 नवम्बर 2017 को गिरफ्तार किया गया था। यह हिरासत इसलिए हुई क्योंकि उसने शिया अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे बर्ताव के खिलाफ प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। उस पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत आरोप लगाए। इनमें एक आरोप तब का है, जब वह 14 साल का था। अल-फराज को 3 नवम्बर 2022 को मौत की सजा सुनाई गई। ऐसे आरोप है कि पूछताछ के दौरान उसे यातना दी गई ती और जबरन कबूलनामे पर दस्तखत पर हस्ताक्षर करवाए गए।
बांग्लादेश के दो नागरिकों को फांसी
सऊदी अरब में मौत की सजा देने का यह मामला तब आया है, जब बांग्लादेश के दो नागरिकों को फांसी देने पर रियाद की आलोचना हो रही है। बांग्लादेश के नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर को पिछले सप्ताह 14 अक्टूबर को मौत की सजा दे दी गई थी। दोनों पर मस्जिद पर अनैतिक कृत्य करने का दोषी पाया गया था। हालांकि, सऊदी ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि दोनों का अपराध क्या था?
कई रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि दोनों को किस करते पाया गया था। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। बांग्लादेश से आ रही रिपोर्टों से पता चलता है कि दोनों शादी शुदा थे लेकिन पति-पत्नी नहीं थे। इस मामले में हैरान करने वाली बात रही कि सऊदी अरब ने फांसी से पहले बांग्लादेश के मिशन को कोई जानकारी नहीं दी। रियाद में मौजूद बांग्लादेशी मिशन को मीडिया से इसकी जानकारी मिली। इस बीच बांग्लादेश ने सऊदी अरब से मामले में पूरी जानकारी मांगी है।















