मुजफ्फरनगर। विकास प्राधिकरण द्वारा उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियों तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशन-2025 (यथा–संशोधन) के विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला उपाध्यक्ष कविता मीना की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें शहर में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और तकनीकी प्रक्रियाओं को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला का मूल उद्देश्य नए संशोधनों और उपविधियों को सभी आर्किटेक्ट, लाइसेंस प्राप्त इंजीनियरों और ड्राफ्टमैन तक स्पष्ट रूप से पहुँचाना था, ताकि भवन निर्माण कार्य नियमानुकूल, सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सके।कार्यशाला के दौरान उपाध्यक्ष द्वारा आर्किटेक्ट आँचल शर्मा, राधिका बंसल और लाइसेंस इंजीनियर श्याम को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। इन सभी को ऑनलाईन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया में उनकी दक्षता, त्वरित और सटीक निस्तारण, तकनीकी समझ तथा प्राधिकरण की डिजिटल कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने में योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इनके कार्यों ने न केवल मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण की पारदर्शी व्यवस्था को सशक्त बनाया है, बल्कि Ease of Doing Business को भी बढ़ावा देते हुए आम नागरिकों और प्राधिकरण के बीच प्रक्रियाओं को सरल और सहज बनाया है। मानचित्र स्वीकृति की डिजिटल प्रणाली को प्रभावी बनाने के कारण शहर में विकास कार्य अधिक सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो रहे हैं।कार्यशाला में प्राधिकरण के सचिव कुँवर बहादुर सिंह, सहायक नगर नियोजक मोहित प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में आर्किटेक्ट, लाइसेंस इंजीनियर और ड्राफ्टमैन उपस्थित रहे। तकनीकी सत्र के दौरान भवन निर्माण उपविधि-2025 एवं संशोधन से संबंधित सभी बिंदुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। सहायक नगर नियोजक ने नियमों के व्यावहारिक उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत किए और बताया कि नए संशोधन शहर की विकास योजना को किस प्रकार गति देंगे। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि निर्माण से पूर्व आवश्यक एनओसी, मानचित्र पास कराने की प्रक्रिया, FAR, कवरेज, सेटबैक, पार्किंग मानक और भवन की ऊँचाई से संबंधित क्या प्रमुख बदलाव किए गए हैं।कार्यशाला में उपस्थित इंजीनियरों और आर्किटेक्ट्स ने प्राधिकरण की नई प्रणाली की सराहना की और कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया में काफी पारदर्शिता और सरलता आई है। प्रशिक्षण के दौरान कई तकनीकी प्रश्न भी पूछे गए जिनका समाधान मौके पर किया गया। प्राधिकरण की ओर से आश्वासन दिया गया कि भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि विकास कार्यों में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए और सभी पेशेवर नवीनतम मानकों से अद्यतन रहें।















