ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के साथ ही 47 साल पुराने शासन का अंत हो गया है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में अनिश्चितता का माहौल है।इस नेतृत्व शून्यता के बीच, शक्तिशाली IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स) ने संवैधानिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर सत्ता की कमान अपने हाथों में ले ली है।अहमद वाहिदी को नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया है, जो ईरान के भविष्य को एक नई और अधिक आक्रामक सैन्य दिशा में मोड़ने का संकेत है। यह बदलाव न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति बल्कि वैश्विक कूटनीति को भी झकझोर रहा है।
अहमद वाहिदी का उदय और IRGC का नियंत्रण
अयातुल्लाह खामेनेई के बाद उपजे शक्ति संघर्ष को दबाने के लिए IRGC ने तेजी से कदम उठाए हैं। अहमद वाहिदी की कमांडर-इन-चीफ के रूप में नियुक्ति यह दर्शाती है कि ईरान अब धार्मिक नेतृत्व के बजाय सैन्य तानाशाही की ओर बढ़ सकता है। वाहिदी का पिछला रिकॉर्ड और उनकी कट्टरपंथी छवि संकेत देती है कि ईरान अपनी आंतरिक सुरक्षा और बाहरी दुश्मनों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाएगा, जिससे क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका और बढ़ गई है।
इजराइल-ईरान संघर्ष पर गंभीर प्रभाव
सर्वोच्च नेता की मौत और नए सैन्य नेतृत्व के आने से इजराइल के साथ चल रहा तनाव अब एक ‘फुल-स्केल’ युद्ध में तब्दील हो सकता है। अहमद वाहिदी को पश्चिमी देशों के खिलाफ कड़े रुख के लिए जाना जाता है। जानकारों का मानना है कि IRGC अपनी सत्ता को वैध ठहराने के लिए इजराइल के खिलाफ बड़ी जवाबी कार्रवाई कर सकती है। यह स्थिति न केवल सीरिया और लेबनान बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की लपटें फैला सकती है।
सैन्य व्यवस्था में विद्रोह की संभावना
खामेनेई की मौत के बाद ईरानी सेना के भीतर अनुशासन टूटने की खबरें आ रही हैं। बताया जा रहा है कि कई निचले रैंक के अधिकारी और जवान अपने बेस पर रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं। सैन्य तालमेल पूरी तरह तितर-बितर हो चुका है, जिससे संकट प्रबंधन (Crisis Management) करना असंभव होता जा रहा है। अगर यह बिखराव जारी रहा, तो ईरान की सुरक्षा व्यवस्था और इजरायल-अमेरिका के खिलाफ जारी मोर्चा पूरी तरह कमजोर पड़ सकता है, जो IRGC के लिए सबसे बड़ी चिंता है।
जन विद्रोह का डर
ईरानी प्रशासन को सबसे ज्यादा डर रविवार को होने वाले संभावित विरोध प्रदर्शनों का है। उन्हें अंदेशा है कि खामेनेई के जाते ही लोग सड़कों पर उतर आएंगे और शासन के खिलाफ विद्रोह शुरू कर देंगे। ईरान अब एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां एक तरफ आंतरिक विद्रोह का खतरा है और दूसरी तरफ बाहरी युद्ध।















