अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई एक संयुक्त अमेरिकी-इजरायली एयर स्ट्राइक में मारे गए। बताया गया कि 28 फरवरी को हुए इस बड़े सैन्य ऑपरेशन में ईरान के न्यूक्लियर, मिसाइल और शीर्ष नेतृत्व से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें तेहरान स्थित खामेनेई का कंपाउंड भी शामिल था। इजरायली सूत्रों के अनुसार हमले के वक्त खामेनेई उसी परिसर में मौजूद थे। सैटेलाइट तस्वीरों में हमले के बाद परिसर में भारी तबाही और काला धुआं उठता दिखाई दिया। 1 मार्च को ईरानी मीडिया ने भी उनकी मौत की पुष्टि कर दी, जिसके बाद पूरे देश में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है।
अली खामेनेई की मौत को मध्य पूर्व की राजनीति के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। वे 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और देश की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक दिशा तय करने में उनकी निर्णायक भूमिका रही। उन्होंने Ruhollah Khomeini के निधन के बाद सत्ता संभाली थी। खोमैनी 1979 की इस्लामिक क्रांति के वैचारिक नेता थे, जिन्होंने पहलवी राजशाही का अंत कर इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना की। खामेनेई ने उनके बाद न केवल शासन की कमान संभाली बल्कि ईरान की सैन्य और पैरामिलिट्री संरचना को भी मजबूत किया, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका अहम रही।
19 अप्रैल 1939 को मशहद में जन्मे खामेनेई एक धार्मिक परिवार से थे। उनके पिता एक सम्मानित आलिम और मुजतहिद थे। प्रारंभिक धार्मिक शिक्षा मशहद में लेने के बाद उन्होंने क़ोम में उच्च इस्लामिक अध्ययन किया, जहां वे खोमैनी के विचारों से गहराई से प्रभावित हुए। 1960 और 70 के दशक में शाह के खिलाफ आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। 1979 की क्रांति के बाद उन्होंने रिवोल्यूशनरी काउंसिल, डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। ईरान-इराक युद्ध के दौरान वे 1981 से 1989 तक ईरान के राष्ट्रपति भी रहे।
खामेनेई को न केवल ईरान बल्कि दुनिया भर के शिया मुसलमानों का प्रमुख धार्मिक नेता माना जाता था। हाल के वर्षों में फिलिस्तीन मुद्दे पर उनके कड़े रुख के कारण सुन्नी समुदाय के कुछ वर्गों में भी उनकी लोकप्रियता बढ़ी थी। अमेरिका और इजराइल के साथ उनके संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे। ताजा हमले के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है। ईरान ने बदले की कसम खाई है, जिससे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन और अधिक अस्थिर हो सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई की मौत से ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव आ सकता है। एक्सपर्ट्स की असेंबली नए सुप्रीम लीडर का चयन करेगी, लेकिन मौजूदा हालात में यह प्रक्रिया राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों से घिरी रहेगी। आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति, क्षेत्रीय रणनीति और वैश्विक संबंधों पर इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।















