मुजफ्फरनगर में कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सभागार में संचारी रोग नियंत्रण अभियान और “दस्तक” अभियान की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी उमेश मिश्रा की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की शासी निकाय एवं अंतर विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी कमल किशोर कंडलकर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया सहित संबंधित विभागों के जनपद स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि संचारी रोगों की रोकथाम में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निजी चिकित्सा संस्थानों और जांच केंद्रों को निर्देशित किया कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे वेक्टर जनित रोगों की जानकारी निर्धारित समय सीमा में अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। यदि कोई संस्था निर्देशों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्त करने तक की कार्रवाई की जाएगी।बैठक में बताया गया कि जनपद में संचारी रोग नियंत्रण अभियान का पहला चरण 1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चलाया जाएगा। यह अभियान प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर विकास, पंचायती राज, पशुपालन, कृषि, महिला एवं बाल विकास, स्वच्छ भारत मिशन और शिक्षा विभाग मिलकर कार्य करेंगे। अभियान के दौरान वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के साथ–साथ व्यापक स्तर पर जनजागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। “दस्तक” अभियान के तहत आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर–घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगी और लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करेंगी, ताकि समय पर इलाज सुनिश्चित हो सके।जिलाधिकारी ने डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, लेप्टोस्पायरोसिस, स्क्रब टायफस, डायरिया और टाइफाइड जैसे रोगों की रोकथाम के लिए सभी विभागों को शासन द्वारा जारी दिशा–निर्देशों के अनुसार काम करने के निर्देश दिए।
जिला मलेरिया अधिकारी अलका सिंह ने बताया कि ये सभी वेक्टर जनित रोग “नोटिफाएबल” श्रेणी में आते हैं, जिनकी समयबद्ध रिपोर्टिंग अनिवार्य है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने कहा कि गर्मी बढ़ने के साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, इसलिए लोगों को सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में इन रोगों की जांच और उपचार की पर्याप्त व्यवस्था है और बुखार होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए, जो निशुल्क उपलब्ध है।बैठक में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद्र गुप्ता ने टीबी नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति की जानकारी दी। इस पर जिलाधिकारी ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सहयोग से अधिक से अधिक टीबी मरीजों को गोद दिलाने के निर्देश दिए, ताकि उनके इलाज और पोषण में सहयोग मिल सके। साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस संबंध में जल्द बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। अंत में जिलाधिकारी ने जनपद की उपलब्धियों की सराहना करते हुए बताया कि यूपी हेल्थ डैशबोर्ड पर मुजफ्फरनगर वर्तमान में प्रदेश में सातवें स्थान पर है और मंडल में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर में संचालित संचारी रोग नियंत्रण अभियान में जनपद ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया था, जो सभी विभागों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।















