अलवर और इसके उपखंड क्षेत्रों में बरसात के मौसम में गहरे जल कुंड, बांध और झरनों पर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागीय अधिकारी और कर्मचारी लापरवाही की चादर ओढ़े हुए हैं।
जिले के किशन कुंड, हाथी कुंड सहित आसपास के क्षेत्रीय जल स्रोतों में भारी बारिश के चलते लबालब पानी भर गया है। ऐसे में लोग रोक-टोक के अभाव में खुलेआम इन खतरनाक स्थलों पर नहाते हुए देखे जा सकते हैं।
जानलेवा लापरवाही: दो युवकों की मौत के बाद भी नहीं चेते जिम्मेदार
कुछ दिनों पहले सरसा माता बांध और पाराशर धाम क्षेत्र में दो युवकों की डूबने से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर होती है।
कलैक्टर की चेतावनी हवा में, निगरानी तंत्र नदारद
जिला कलैक्टर द्वारा खतरनाक जलभराव क्षेत्र और झरनों से दूर रहने की चेतावनी और अपील की गई थी, लेकिन उसका कोई असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा है।
इन संवेदनशील स्थलों पर न तो कोई निगरानी तंत्र सक्रिय है, न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
जरूरी है सख्त कार्रवाई और त्वरित निगरानी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को चाहिए कि इन स्थलों पर तत्काल सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें। पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त निगरानी टीम बनाई जाए ताकि भविष्य में किसी जानलेवा हादसे को टाला जा सके।















