देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवान का पार्थिव शरीर जब उनके गांव पहुंचा, तो वहां का माहौल गमगीन हो गया। हर आंख नम थी, लेकिन सबसे ज्यादा भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब शहीद के बेटे ने अपने पिता का चेहरा देखा। अपने आंसुओं को रोक न सका और फूट-फूटकर रो पड़ा। उसकी चीखें सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। शहीद की अंतिम यात्रा में गांव से लेकर आसपास के इलाकों से हजारों लोग उमड़े। भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से वातावरण गूंज उठा।
बेटे ने रोते हुए कहा, “पापा की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता, लेकिन मुझे उनकी शहादत पर गर्व है। वे हमेशा मेरे हीरो रहेंगे।” शहीद के परिवार में बूढ़े माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव के स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखा जाए और सरकार उनके परिवार की पूरी मदद करे। यह बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा। शहीद की शहादत पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है।















