मुजफ्फरनगर में जिला गंगा समिति के तत्वावधान में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, नगर क्षेत्र में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों की निर्मलता, अविरलता और संरक्षण के उद्देश्य से जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन का नेतृत्व जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और मुख्य विकास अधिकारी कण्डारकर कमलकिशोर देशभूषण के निर्देशन में हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं में गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना था, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी स्वच्छ और अविरल गंगा का महत्व समझ सकें।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार और विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला समन्वयक बालिका शिक्षा अंकुर कुमार उपस्थित रहे। उन्होंने छात्राओं को गंगा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वच्छ गंगा न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से, बल्कि पर्यावरणीय और जीवन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर छात्राओं को गंगा स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई, जिसमें उन्हें यह संकल्प कराया गया कि वे प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करेंगी और गंगा की निर्मलता व संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास करेंगी।कार्यक्रम की प्रमुख आकर्षण “प्लास्टिक का थैला गंगा को करे मैला” विषय पर आयोजित क्विज प्रतियोगिता रही। प्रतियोगिता में बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गंगा स्वच्छता, प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक के दुष्प्रभावों से संबंधित सवालों के जवाब देकर अपने ज्ञान का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के अंत में सफल प्रतिभागियों को हस्तनिर्मित पेपर बैग वितरित किए गए। इन पेपर बैगों का वितरण इस संदेश को देने के लिए किया गया कि प्लास्टिक की जगह हमें पर्यावरण मित्र विकल्पों का उपयोग करना चाहिए।
आयोजन को सफल बनाने में प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग तथा जिला गंगा समिति के सदस्य सचिव राजीव कुमार का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजीव कुमार और जिला परियोजना अधिकारी हर्ष कुमार द्वारा किया गया। विद्यालय की वार्डन बबीता ने भी पूरे आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।इस आयोजन ने न केवल छात्राओं को गंगा संरक्षण के महत्व से अवगत कराया, बल्कि उन्हें व्यवहारिक रूप से यह भी समझाया कि छोटे-छोटे प्रयास जैसे प्लास्टिक का प्रयोग न करना और वैकल्पिक वस्तुओं का उपयोग करना गंगा और पर्यावरण की रक्षा में कितने प्रभावी हो सकते हैं। इस प्रकार का आयोजन आने वाली पीढ़ी में पर्यावरणीय चेतना को मजबूती प्रदान करेगा और स्वच्छ, स्वस्थ और हरित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
















