अजमेर में प्रशासनिक कार्रवाई के तहत एक डॉक्टर के घर पर बुलडोजर चलाए जाने से भारी हंगामा मच गया। स्थानीय प्रशासन ने इसे अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई बताया, लेकिन परिवार ने इसे अन्याय करार देते हुए कहा कि उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। कार्रवाई के दौरान घर का सामान बाहर निकालने का मौका भी नहीं दिया गया, जिससे घर में रखे कपड़े, खिलौने, किताबें और अन्य जरूरी सामान मलबे में दब गए। परिवार के बच्चों ने रोते हुए अपने खिलौने और सामान की दुहाई दी, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया। डॉक्टर और उनके परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए ही बुलडोजर चला दिया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। भीड़ को काबू में करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। दूसरी ओर, नगर निगम का कहना है कि यह निर्माण सरकारी जमीन पर था और नोटिस दिए जाने के बाद भी अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, इसलिए कार्रवाई करनी पड़ी। इस पूरे मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है, विपक्षी दलों ने इसे तानाशाही बताते हुए सरकार को घेरा और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। फिलहाल, प्रशासन का कहना है कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं, लेकिन इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या लोगों को उनके सामान निकालने का समय नहीं दिया जाना चाहिए था?















