भारत में जनसंख्या बढ़ने और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए समय-समय पर परिसीमन (Delimitation) किया जाता है। परिसीमन का मतलब किसी क्षेत्र की चुनावी सीमाओं को दोबारा तय करना होता है, ताकि जनसंख्या के अनुसार संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का संतुलन बना रहे। यह प्रक्रिया चुनाव आयोग और परिसीमन आयोग की देखरेख में होती है।
आखिरी बार भारत में परिसीमन 2008 में हुआ था, और अब 2026 के बाद फिर से इसे लागू किए जाने की संभावना है। परिसीमन इसलिए जरूरी होता है क्योंकि देश में कुछ राज्यों की आबादी तेजी से बढ़ती है, जबकि कुछ राज्यों में जनसंख्या स्थिर रहती है। अगर परिसीमन न किया जाए, तो जिन राज्यों की जनसंख्या बढ़ी है, वहां के मतदाताओं को कम प्रतिनिधित्व मिलेगा और जिनकी जनसंख्या स्थिर है, उन्हें ज्यादा सीटें मिलती रहेंगी। परिसीमन से यह सुनिश्चित किया जाता है कि हर वोटर को समान प्रतिनिधित्व मिले और चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो। यह प्रक्रिया आमतौर पर हर
कुछ दशकों में होती है, लेकिन इसे राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार स्थगित भी किया जा सकता है, जैसा कि 1976 में आपातकाल के दौरान किया गया था। परिसीमन से कुछ क्षेत्रों की सीटें बढ़ सकती हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों की सीटें कम भी हो सकती हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के अनुपात में सभी को समान प्रतिनिधित्व देना होता है, ताकि लोकतंत्र को और मजबूत किया जा सके।















