रूस और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिका से लौटते वक्त महज पांच घंटे के ठहराव के दौरान भारी-भरकम कीमत चुकानी पड़ी। दरअसल, पुतिन का विमान ईंधन भरने के लिए अलास्का के एंकरेज एयरपोर्ट पर उतरा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी अनौपचारिक बैठक भी यहीं हुई। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से रूस के विमानों को सामान्य भुगतान प्रक्रिया का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई। ऐसे में पुतिन के दल को मजबूरन करीब 2.2 करोड़ रुपये नकद में भुगतान करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, यह रकम डॉलर में तुरंत मौके पर चुकाई गई ताकि विमान में फ्यूल डाला जा सके और पुतिन अपनी यात्रा जारी रख सकें। प्रतिबंधों के चलते रूस से जुड़े किसी भी लेन-देन को अमेरिकी बैंकिंग सिस्टम स्वीकार नहीं करता। यही कारण था कि पुतिन के विमान के लिए फ्यूल भुगतान डिजिटल माध्यम से संभव नहीं हो पाया। स्थिति इतनी असामान्य थी कि नकद रकम एयरपोर्ट अधिकारियों को सीधे सौंपी गई। यह कदम अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बेहद दुर्लभ माना जा रहा है।
इस बीच, ट्रंप और पुतिन के बीच हुई मुलाकात भी चर्चा का विषय बन गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों नेताओं ने लगभग दो घंटे तक द्विपक्षीय संबंधों, यूक्रेन युद्ध, तेल-गैस व्यापार और भविष्य की संभावनाओं पर बातचीत की। हालांकि, यह मीटिंग औपचारिक तौर पर घोषित नहीं की गई थी और अचानक तय हुई थी। अमेरिकी प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने इसे “निजी बातचीत” का नाम दिया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि कैसे अमेरिकी प्रतिबंध रूस को हर स्तर पर प्रभावित कर रहे हैं। यहां तक कि दुनिया की महाशक्ति रूस के राष्ट्रपति को भी अपनी उड़ान भरने के लिए कैश पर निर्भर होना पड़ा। विपक्षी खेमों में इसे रूस की वैश्विक स्थिति पर चोट के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, ट्रंप समर्थक इस घटनाक्रम को अमेरिका की ताकत और प्रतिबंधों की सफलता के सबूत के रूप में पेश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, पुतिन का यह पांच घंटे का ठहराव रूस-अमेरिका रिश्तों के तनाव और प्रतिबंधों की वास्तविक प्रभावशीलता को उजागर करता है। यह मामला अब दोनों देशों की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों का केंद्र बन गया है।















