आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद Sanjay Singh ने दिल्ली में चल रही प्रीपेड टैक्सी योजना से जुड़े 112 कर्मचारियों को नौकरी से हटाए जाने पर सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों ने पिछले करीब 40 वर्षों तक मेहनत कर इस योजना को सफल बनाया, लेकिन अब अचानक उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि 50 से 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके ये कर्मचारी अब कहां नौकरी तलाशेंगे। उन्होंने मांग की कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और नई व्यवस्था के तहत सभी कर्मचारियों को समायोजित करे।
संजय सिंह ने बताया कि वर्ष 1986 में Delhi Police ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रीपेड टैक्सी व्यवस्था शुरू की थी। इस योजना के तहत बूथों से टिकट जारी होते थे और पुलिस निगरानी में यात्रियों को सुरक्षित घर तक पहुंचाया जाता था। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के कारण यह योजना लाभकारी बनी और इसके खाते में लगभग 10 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट राशि जमा हुई। कर्मचारियों को प्रतिदिन लगभग 850 रुपये का भुगतान किया जाता था और वर्षों की सेवा के बाद भी उन्हें स्थायी दर्जा नहीं मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि अभी 38 अन्य कर्मचारियों की नौकरी भी खतरे में है और उन्हें भी जल्द हटाया जा सकता है। उनका कहना है कि 1993-96 के दौरान कार्मिक विभाग की ओर से नियमितीकरण के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि बिना पूर्व नोटिस 22 फरवरी से टर्मिनेशन लेटर जारी कर दिए गए। एक महिला कर्मचारी शहनाज ने कहा कि डिजिटलाइजेशन के नाम पर टैब और वाई-फाई देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इसके बजाय नौकरी ही छीन ली गई। कर्मचारियों ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए समान काम के लिए समान वेतन की मांग दोहराई है और न्याय की गुहार लगाई है।















