इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत की खबर ने मध्य-पूर्व में भारी तनाव पैदा कर दिया है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति को झकझोर दिया है और कई देशों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। भारत में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हो गई है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री Mehbooba Mufti ने इस घटना को दुखद बताते हुए हमले की कड़ी निंदा की है, जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने लोगों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र के शीर्ष नेता पर इस तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने मुस्लिम देशों की चुप्पी पर भी नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह की घटनाओं पर सामूहिक और सशक्त प्रतिक्रिया होनी चाहिए थी। उनका मानना है कि अगर विश्व समुदाय समय रहते हस्तक्षेप करता तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। मुफ्ती ने इसे सिर्फ ईरान पर हमला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर प्रहार बताया।
दूसरी ओर, उमर अब्दुल्ला ने इस संवेदनशील मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि वैश्विक घटनाओं का असर स्थानीय माहौल पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें। अब्दुल्ला ने कहा कि जो लोग इस घटना से दुखी हैं, उन्हें शांति से अपना दुख मनाने दिया जाए, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा या अशांति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में शांति और सौहार्द बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।
गौरतलब है कि इजराइल और अमेरिका ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़ा सैन्य अभियान चलाया था। इसी दौरान खामेनेई के मारे जाने की खबर सामने आई। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि और अलग-अलग स्रोतों से भिन्न दावे भी सामने आ रहे हैं, लेकिन खबर ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार, कूटनीतिक रिश्तों और सुरक्षा समीकरणों पर असर डालना शुरू कर दिया है। मध्य-पूर्व में पहले से जारी तनाव अब और गहराता दिखाई दे रहा है।
भारत सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विदेश मंत्रालय हालात पर नजर बनाए हुए है। इस बीच देश के विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने नजरिए से बयान दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना का असर वैश्विक तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों पर पड़ सकता है। ऐसे समय में राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह जनता को उकसाने के बजाय संयम और शांति का संदेश दे। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि किसी बाहरी घटना को लेकर आंतरिक शांति भंग न हो।















