DGCA की एडवाइजरी: मध्य पूर्व और खाड़ी हवाई क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय एयरलाइंस को अलर्ट.

भारत के विमानन नियामक, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने शनिवार को सभी भारतीय विमानन कंपनियों के लिए एक आपातकालीन सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है. यह चेतावनी मध्य पूर्व और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के हवाई क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए जारी की गई है.DGCA ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हमलों के बाद नागरिक विमानों के लिए परिचालन वातावरण अत्यंत जोखिम भरा हो गया है.

हवाई क्षेत्र में संभावित खतरों की पहचान

यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) द्वारा जारी ‘कॉन्फ्लिक्ट ज़ोन इंफॉर्मेशन बुलेटिन’ की समीक्षा के बाद DGCA ने कई गंभीर खतरों को रेखांकित किया है. नियामक के अनुसार, क्षेत्र में क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों की मौजूदगी से नागरिक विमानों के लिए खतरा पैदा हो गया है. मुख्य जोखिमों में नागरिक विमानों की गलत पहचान (Misidentification), सैन्य हस्तक्षेप के दौरान परिचालन संबंधी त्रुटियां और ईरान द्वारा जवाबी कार्रवाई की संभावना शामिल है.

इन क्षेत्रों से बचने की सलाह

DGCA ने भारतीय ऑपरेटरों को सलाह दी है कि वे निम्नलिखित ‘फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन’ (FIRs) और हवाई क्षेत्रों में सभी ऊंचाई और उड़ान स्तरों पर परिचालन से बचें:

  • ईरान और इराक: तेहरान (OIIX) और बगदाद (ORBB).
  • इजरायल और पड़ोसी: तेल अवीव (LLFI), अम्मान (OJAC) और बेरूत (OLBB).
  • खाड़ी देश: कुवैत (OKAC), जेद्दा (OEJD), अमीरात (OMAE), बहरीन (OBBB), दोहा (OTDF) और मस्कट (OOMM).

यह एडवाइजरी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और 2 मार्च 2026 तक वैध रहेगी. इसके साथ ही सीरिया और यमन के हवाई क्षेत्र से जुड़ी पुरानी पाबंदियां भी जारी रहेंगी.

उड़ानों पर असर और यात्रियों की सुरक्षा

इस तनाव के कारण भारत और खाड़ी देशों के बीच चलने वाले प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई गलियारे बाधित हुए हैं. एयर इंडिया (Air India) और इंडिगो (IndiGo) जैसी बड़ी एयरलाइंस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई उड़ानों को रद्द कर दिया है या उनके मार्ग बदल दिए हैं.

एयरलाइंस ने यात्रियों से अपील की है कि वे आधिकारिक चैनलों के माध्यम से अपनी उड़ानों की स्थिति की जांच करते रहें. हवाई अड्डों पर फंसे हुए यात्रियों की मदद के लिए हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं.

सुरक्षा प्राथमिकता और भविष्य की रणनीति

विमानन नियामक ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे संबंधित देशों द्वारा जारी ‘नोटिस टू एयरमेन’ (NOTAMs) पर चौबीसों घंटे नजर रखें. DGCA ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षित ‘फ्लाइट कॉरिडोर’ उपलब्ध होने के बाद ही सामान्य सेवाएं बहाल की जाएंगी. यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक विमानन क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.

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