मुजफ्फरनगर जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 27 फरवरी को आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से प्राप्त और जांच हेतु प्रेषित किए गए शिकायती प्रार्थना पत्रों की स्थिति का अवलोकन किया गया। इसमें पाया गया कि शिकायतकर्ता द्वारा उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए गए प्रार्थना पत्रों को समय पर प्रेषित किया जा रहा है, लेकिन कुछ जांच अधिकारियों द्वारा इन्हें निर्धारित समय सीमा (अधिकतम 02 दिवस) के भीतर निस्तारित न कर कार्यालय स्तर पर लंबित रखा जा रहा है। इसके अलावा, कई मामलों में निस्तारण निर्धारित तिथि (30 दिवस) के ठीक पहले किया जा रहा है और अन्य विभागों से संबंधित प्रकरणों को अधोहस्ताक्षरी कार्यालय को वापस भेजा जा रहा है।
इस प्रकार की कार्यशैली से न केवल निस्तारण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि जनपद और तहसील की रैंक भी गिर रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा ऐसे मामलों में असंतोषजनक फीडबैक या सी-श्रेणी प्रदान की जाती है, जिससे प्रदेश स्तर पर जिले की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने निर्देश दिया है कि आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त प्रत्येक संदर्भ की जांच निर्धारित समय सीमा (अधिकतम 02 दिवस) के भीतर पूरी कर उसे संबंधित अधिकारी को आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजा जाए। अन्य विभागों से जुड़े मामलों को उसी दिन वापस किया जाए। किसी भी कार्य दिवस में पोर्टल का अवलोकन कर शिकायतों की स्थिति की रैंडम जांच की जाएगी। यदि किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली विपरीत पाई गई, तो उसे दोषी मानते हुए एकपक्षीय रूप से दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। इस कार्य में लापरवाही बरतने से जनपद और तहसील की छवि प्रभावित होती है, इसलिए इस पर व्यक्तिगत ध्यान देना आवश्यक है।















