बांदा। सरकार की मंशा है कि जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के जन्मजात दोषों से पीड़ित बच्चों को समय पर बेहतर और निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे भी सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसी उद्देश्य के तहत जनपद बांदा में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान कर उनका समुचित उपचार कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाता है, जिसके जरिए जन्मजात विकृतियों से ग्रसित बच्चों को चिन्हित किया जाता है। वर्ष 2025-26 में अब तक 116 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है, जिनमें रीढ़ की हड्डी में विकृति, पैर व कूल्हे का टेढ़ापन, कटे होंठ, तालू का जुड़ा न होना, मोतियाबिंद, भेंगापन, अल्पविकसित मस्तिष्क, दिल में छेद सहित अन्य गंभीर जन्मजात दोष पाए गए। स्क्रीनिंग के बाद इन बच्चों को उनकी बीमारी के अनुसार उपचार के लिए बांदा स्थित रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज सहित प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ और आगरा के बड़े अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में भर्ती कराया गया।
अब तक 103 बच्चों की सफल सर्जरी कराई जा चुकी है, जबकि 13 बच्चों का इलाज और सर्जरी की प्रक्रिया जारी है। इन सभी बच्चों का उपचार पूरी तरह निःशुल्क कराया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर विजेंद्र कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा समय-समय पर स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और गांवों में शिविर लगाकर बच्चों की जांच की जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की जन्मजात बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही पहचान लिया जाए। उनका कहना है कि सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिससे वे भी स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सकें। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे इस अभियान से न केवल बच्चों को नया जीवन मिल रहा है, बल्कि उनके परिवारों में भी खुशी और उम्मीद की किरण जगी है। स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और सरकार की प्रतिबद्धता के चलते बांदा में यह योजना प्रभावी रूप से संचालित हो रही है, जिससे भविष्य में और अधिक बच्चों को लाभ मिलने की उम्मीद है।















