सीएम योगी और जयंत चौधरी की मुलाकात: यूपी उपचुनावों से पहले सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव

सीएम योगी और जयंत चौधरी की मुलाकात: यूपी उपचुनावों से पहले सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव इस मुलाकात के सियासी मायने कई हो सकते हैं। यूपी में 10 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के मद्देनजर यह मुलाकात अहम हो सकती है। बीजेपी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे जयंत चौधरी के समर्थन को सुनिश्चित करें, क्योंकि उनकी पार्टी का प्रभाव कुछ क्षेत्रों में अच्छा है।

सीएम योगी और जयंत चौधरी के बीच कांवड़ यात्रा के नियमों को लेकर विवाद हो गया था, लेकिन अब दोनों नेताओं की मुलाकात यह संकेत देती है कि उन्होंने आपसी मतभेदों को सुलझा लिया है। जयंत चौधरी द्वारा मुख्यमंत्री योगी के विजन की तारीफ करना इस बात का संकेत हो सकता है कि वे बीजेपी के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं।

इस मुलाकात से यह भी संकेत मिलते हैं कि जयंत चौधरी की पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर आगामी चुनावों में गठबंधन कर सकती है। यह मुलाकात दोनों पार्टियों के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है और इससे उपचुनावों में बीजेपी को फायदा हो सकता है।सियासी दृष्टिकोण से, इस मुलाकात के जरिए बीजेपी ने एक बार फिर यह साबित करने की कोशिश की है कि वे सहयोग और संवाद के माध्यम से अपने सहयोगियों के साथ रिश्ते सुधारने और मजबूत करने में सक्षम हैं।

10 सीटों पर होने हैं उपचुनाव

यूपी में 10 सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इस 10 में से 5 सीटें सपा, 3 बीजेपी और 1-1 सीट रालोद और निषाद पार्टी के कब्जे में थी। लोकसभा चुनाव में यूपी के 9 विधायक सांसद बन गए। जबकि सपा विधायक इरफान सोलंकी को सजा होने के बाद उन्होंने सीट छोड़ दी। जयंत चौधरी मीरापुर के साथ-साथ खैर सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। मीरापुर सीट पर तो 2022 में रालोद ने जीत दर्ज की थी। वहीं खैर सीट पर जाट वोट बैंक की अधिकता के कारण रालोद यह सीट बीजेपी से मांग रही है।

2 सीटें मांग रही हैं रालोद

सूत्रों की मानें तो बीजेपी रालोद को मीरापुर की जगह पर कुंदरकी सीट दे सकती हैं। हालांकि इसके लिए जयंत चौधरी का खेमा कितना तैयार है? यह देखने वाली बात होगी। जानकारों की मानें तो रालोद मीरापुर सीट कभी नहीं छोड़ेगी। हां वह कुंदरकी या खैर को लेकर समझौता कर सकती है।

 

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